, Feb. 26 -- बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि नए चापाकलों की स्थापना केवल वैकल्पिक पेयजल स्रोत के रूप में ही की जाएगी, विशेषकर उन छूटे टोलो/बसावटों में जहाँ किसी कारणवश 'हर घर नल का जल' योजना के अंतर्गत अवसंरचना का निर्माण अभी पूर्ण नहीं हो सका है। चापाकल स्थापना का स्थल चयन जलस्तर की स्थिति, पंचायत स्तर पर किए गए फील्ड सर्वे एवं जिला प्रशासन के साथ समन्वय के आधार पर किया जाएगा। बैठक में ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस से संबंधित अनुबंधों की स्थिति, टैंकर परिचालन, वाटर एटीएम की कार्यशीलता तथा जलापूर्ति योजनाओं के रख-रखाव की भी समीक्षा की गई। जिन योजनाओं में एकरारनामा की अवधि समाप्त होने वाली है, वहाँ नए संवेदक के चयन तक वर्तमान संवेदक को समय विस्तार देने के निर्देश दिए गए, जिससे किसी भी स्थिति में पेयजल आपूर्ति एवं रख-रखाव प्रभावित न हो।

इसी क्रम में पंप ऑपरेटरों के भुगतान के विषय पर विशेष रूप से चर्चा करते हुए सचिव ने स्पष्ट किया कि पंप ऑपरेटरों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना संबंधित कार्यपालक अभियंताओं की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित जिला पंचायती राज पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर लंबित भुगतानों का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करें। आवश्यकता होने पर जिला पदाधिकारी स्तर से भी सहयोग लिया जाए तथा यदि जिला स्तर पर भुगतान से संबंधित समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो ऐसे मामलों को अविलंब मुख्यालय स्तर पर रेखांकित किया जाए।

सचिव ने यह भी रेखांकित किया कि योजनाओं के सुचारु संचालन में पंप ऑपरेटरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः उनके भुगतान को विभाग द्वारा उच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

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