, Jan. 24 -- तीसरे दिन के प्रारंभिक सत्र में प्रीतम कुमार ने भोजपुरी प्रकार की कैथी लिपि का परिचय कराते हुए संपूर्ण उत्तर भारत में कैथी लिपि में उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों की जानकारी साझा की। इसी दिन वकार अहमद ने भोजपुरी क्षेत्रों से प्राप्त कैथी दस्तावेजों का व्यावहारिक अभ्यास कराया।चतुर्थ दिवस में प्रशिक्षकों द्वारा मगध क्षेत्र की कैथी लिपि के अक्षर ज्ञान पर विशेष बल दिया गया तथा इस शैली में उपलब्ध भूमि से जुड़े दस्तावेजों का अभ्यास कराया गया।प्रशिक्षण के पांचवें एवं अंतिम दिन प्रीतम कुमार ने तिरहुत क्षेत्र की कैथी वर्णमाला सहित कैथी लिपि के समग्र क्षेत्रों के अक्षरों को तालिका के रूप में समझाया।
समापन सत्र में वकार अहमद ने भूमि से संबंधित एक केवाला दस्तावेज का अक्षरशः अनुवाद कराकर प्रशिक्षुओं से स्वयं लेखन अभ्यास कराया।आरएसटीआई के प्राचार्य दिव्य राज गणेश ने समापन के मौके पर कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कैथी लिपि की समझ को सुदृढ़ करने के साथ-साथ भूमि अभिलेखों के अध्ययन और संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। इससे राज्य को इस भाषा के अनुवाद में काफी लाभ मिलेगा।
उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कैथी लिपि में उपलब्ध पुराने दस्तावेजों के कारण राज्य के आम लोगों को लंबे समय से व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन परेशानियों को दूर करने के उद्देश्य से कैथी लिपि के जानकार विशेषज्ञों का पैनल गठित कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया था।उन्होंने कहा कि विभाग के प्रधान सचिव एवं सचिव द्वारा इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया है। अब प्रशिक्षित कैथी लिपि विशेषज्ञों के लिए प्रति पृष्ठ के हिसाब से दर भी तय कर दी गई है, जिससे आम नागरिकों को आसानी से और पारदर्शी तरीके से दस्तावेजों का अनुवाद उपलब्ध कराया जा सके।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इन विशेषज्ञों की सहायता से अब पुराने भूमि अभिलेखों का सरल और सटीक अनुवाद संभव होगा। इससे न केवल आम लोगों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के कार्यों को भी गति और स्पष्टता मिलेगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित