मधुबनी , फरवरी 21 -- बिहार में मधुबनी जिले के रहिका प्रखंड अंतर्गत जितवारपुर गांव में शनिवार को बिहार के पहले शिल्पग्राम का कार्यारंभ हुआ।
यह परियोजना भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के नेशनल हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत और बिहार संग्रहालय के सहयोग से प्रारंभ की गई है। चार सौ घरों वाला यह गांव देश में सर्वाधिक पद्मश्री कलाकार देने वाला विशिष्ट गांव माना जाता है।
उद्घाटन समारोह की शुरुआत कला-संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने की।कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने की। इस अवसर पर बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक,अपर निदेशक सह नोडल पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। पद्मश्री कलाकारों में बौआ देवी,दुलारी देवी,शांति देवी एवं शिवन पासवान की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बनाया।
इस अवसर पर मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जितवारपुर गांव को शिल्पग्राम के तौर पर विकसित करने की योजना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि शिल्पग्राम के निर्माण के लिए केंद्र सरकार से नौ करोड़ दो हजार 470 रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है। कुल राशि का 80 प्रतिशत व्यय वस्त्र मंत्रालय द्वारा और 20 प्रतिशत बिहार संग्रहालय द्वारा वहन किया जाएगा। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को सौंपी गई है।
श्री प्रसाद ने बताया कि परियोजना के प्रथम चरण में डाकबंगला परिसर के निकट कॉमन फैसिलिटी सेंटर से सटे भवन में चार कमरों का आधुनिक गेस्ट हाउस बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कमरे में शौचालय एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही 12 स्टॉलों का निर्माण होगा। जिनमें मधुबनी पेंटिंग, गोदना कला,पेपरमेशी,सुजनी एवं टेराकोटा शिल्प को स्थान दिया जाएगा। गांव के प्रवेश द्वार पर भव्य तोरणद्वार का निर्माण किया जाएगा। जिसे मधुबनी चित्रकला से सजाया जाएगा। तीन सरकारी तालाबों का जीर्णोद्धार,सड़क का सुदृढ़ीकरण,लगभग 100 स्ट्रीट लाइट की स्थापना तथा घरों की बाहरी दीवारों पर कलाकारों द्वारा मधुबनी पेंटिंग उकेरने की योजना भी शामिल है। एक वर्ष के भीतर सभी कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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