, April 7 -- सचिव ने यह भी निर्देश दिये कि कार्यशाला के दौरान अभियंता अपने क्षेत्रीय अनुभवों को साझा करें तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों पर खुलकर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि समस्याओं की सही पहचान और सामूहिक समाधान से ही योजनाओं के उद्देश्यों की प्राप्ति संभव है तथा उनका बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पहले किसान काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर रहते थे, लेकिन सरकार के प्रयासों से अब यह निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है और वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रगति हुई है।
सचिव ने जल संसाधनों की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि तालाब, पोखर एवं अन्य जल निकाय हमारे लिए अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण एवं समुचित उपयोग से न केवल सिंचाई बल्कि मत्स्य पालन जैसे अन्य आय के स्रोतों को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने जल प्रबंधन के ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए समग्र जल प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिलों में योजनाओं के चयन के लिये सर्वेक्षण किया गया, जिसके तहत लगभग 6500 योजनाएं चिन्हित की गई हैं। इनमें से वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 1300 योजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं, तथा आगामी पांच वर्षों में निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सभी योजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
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