, April 25 -- एम्स पटना में न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफ़ेसर और प्रमुख, साथ ही इस सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. विकास चंद्र झा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि न्यूरोवैस्कुलर की पूरी देखभाल जिसमें एंडोवैस्कुलर और माइक्रोसर्जिकल तकनीकें शामिल हैं, अभी पूरे भारत में सिर्फ़ लगभग 50 केंद्रों पर और बिहार में तो सिर्फ़एक-दो केंद्रों पर ही उपलब्ध है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए ऐसी सुविधाओं का विस्तार कम से कम 100 गुना तक करना बहुत ज़रूरी है।उन्होंने बताया कि भारत में सिर्फ़ लगभग 50-60 न्यूरोसर्जन ही ऐसे हैं जो माइक्रोसर्जिकल और एंडोवैस्कुलर, दोनों तरह की प्रक्रियाओं में माहिर हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए इस कुशल कार्यबल का विस्तार करना बहुत ज़रूरी है।

लगभग 100 युवा न्यूरोसर्जनों को जान बचाने वाली प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित किया गया। इनमें एक्यूट स्ट्रोक के लिए मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी, कैरोटिड आर्टरी स्टेंटिंग, एन्यूरिज्म कोइलिंग, आर्टेरियोवेनस एम्बोलिज़ेशन और जटिल वैस्कुलर घावों के लिए सेरेब्रल बाईपास सर्जरी जैसी प्रक्रियाएँ शामिल थीं।

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