, March 9 -- इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत 296 करोड़ रुपये है। अल्ट्रा पॉड्स के ट्रैक की कुल लंबाई लगभग पांच किलोमीटर होगी। इसका संचालन विश्वेश्वरैया भवन से शुरू होकर विकास भवन और विधान सभा होते हुए पुराने सचिवालय तक किया जाएगा।

यात्रियों की सुविधा के लिए मात्र सात सेकंड के अंतराल पर दूसरा पॉड अपने निर्धारित स्टेशन पर उपलब्ध रहेगा। एक पॉड में छह लोगों के बैठने की क्षमता होगी। इस ट्रैक पर कुल 59 पॉड्स का संचालन किया जाएगा।

शुरुआती चरण में कुल नौ स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें से दो स्टेशनों के पास पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा एक कंट्रोल रूम और एक अल्ट्रा पॉड पार्किंग फैसिलिटी का भी निर्माण किया जाएगा। सभी अल्ट्रा पॉड्स में सुरक्षा के दृष्टिकोण से कैमरे लगे होंगे। इनमें किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा और यह पूरी तरह से स्वचालित रहेगा।

यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल और कार्बन-पॉजिटिव नेटवर्क है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि अल्ट्रा पॉड्स के ट्रैक के निर्माण में किसी भी पेड़ को नहीं काटा जाएगा। मोटर चालित वाहनों की आवाजाही (विशेषकर सरकारी कार्यों से संबंधित) कम होने से क्षेत्र में उत्सर्जन और सड़क जाम में भारी कमी आएगी।

यह व्यवस्था विशेष रूप से सुबह और शाम के ऑफिस के समय भीड़ को कम करने के लिए शुरू की जा रही है, जिससे आम लोगों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी। इसका किराया बेहद मामूली रखा जाएगा, जिससे यह सभी के लिए उपयोगी और सुलभ हो। यात्री टोकन या फिर कार्ड रिचार्ज कर अल्ट्रा पॉड्स का आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे।

बिहार सरकार की यह पहल पूरी पहल भारत सरकार के स्मार्ट, सस्टेनेबल और इंटीग्रेटेड मोबिलिटी के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है। इससे न केवल प्रमुख प्रशासनिक सुविधाओं के बीच पहुंच आसान होगी, बल्कि सुरक्षा मजबूत होगी और परिचालन दक्षता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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