बिलासपुर , अप्रैल 16 -- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में सड़कों की खराब हालत और निर्माण कार्यों में हो रही देरी को लेकर उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंड पीठ ने स्पष्ट कहा कि प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के नाम पर जनता को लंबे समय तक परेशान नहीं किया जा सकता। जिसकी गुरुवार को जानकारी दी गई।
दरअसल, शहर की जर्जर सड़कों को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट के आधार पर उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर सुनवाई शुरू की है। न्यायालय ने माना कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा में देरी का सीधा असर आम लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ता है।
सुनवाई के दौरान खंड पीठ ने नगर निगम आयुक्त और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यपालन अभियंता को निर्देश दिए कि अगली सुनवाई से पहले वे विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करें और यह भी स्पष्ट करें कि सभी कार्य कब तक पूरे होंगे।
पीडब्ल्यूडी की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 44.59 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य फिलहाल टेंडर प्रक्रिया में हैं। पेंड्रीडीह से नेहरू चौक तक 15.37 किलोमीटर सड़क के लिए 4038.57 लाख रुपये का टेंडर 9 अप्रैल को जारी किया गया है, जिसकी अंतिम तिथि चार मई निर्धारित है। वहीं देवकीनंदन चौक से महामाया चौक तक 1.30 किलोमीटर सड़क के लिए करीब 1.84 करोड़ रुपये के काम के लिए 15 अप्रैल तक टेंडर आमंत्रित किए गए थे। नेहरू चौक से उसलापुर तक 3.20 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 420.98 लाख रुपये की परियोजना को तकनीकी मंजूरी मिल चुकी है और ड्राफ्ट एनआईटी भेज दी गई है।
नगर निगम आयुक्त ने अपने शपथपत्र में बताया कि अपोलो चौक से मानसी गेस्ट हाउस तक सड़क का डामरीकरण कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा राजकिशोर नगर चौक और संत विहार चौक से अपोलो चौक तक बिजली के खंभों की शिफ्टिंग और नाली निर्माण का काम भी पूरा हो चुका है। फिलहाल मानसी गेस्ट हाउस से रपटा चौक तक अतिक्रमण हटाने और पेड़ों के प्रत्यारोपण का कार्य जारी है।
उच्च न्यायालय ने इस मामले में सिर्फ सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास से जुड़े पहलुओं पर भी जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक और जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधवक को भी व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करना होगा।
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