रांची , जनवरी 20 -- झरखंड की राजधानी रांची में स्थित प्रतिष्ठित बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा के जैव अभियांत्रिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने पादप विज्ञान के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार के अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान से प्रतिष्ठित कोर अनुसंधान अनुदान प्राप्त किया है।

यह अनुदान गेहूं में पत्ती जंग रोग के दौरान होने वाली जैविक प्रक्रियाओं के अध्ययन से संबंधित एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना के लिए प्रदान किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य पत्ती जंग रोग के संक्रमण के समय गेहूं तथा संबंधित कवक में पाए जाने वाले सूक्ष्म आरएनए की भूमिकाओं को समझना तथा उनसे उत्पन्न होने वाले पेप्टाइड्स का विस्तृत विश्लेषण करना है। यह अनुसंधान भविष्य में रोग-प्रतिरोधी गेहूं की किस्मों के विकास में सहायक सिद्ध हो सकता है।

इस शोध परियोजना का नेतृत्व प्रोफेसर कुनाल मुखोपाध्याय प्रधान अन्वेषक के रूप में तथा प्रोफेसर मनीष कुमार सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में कर रहे हैं। शोधार्थी ऋषव कुमार दास इस परियोजना में प्रमुख शोध सहयोगी के रूप में योगदान दे रहे हैं।

इस अनुसंधान पहल के अंतर्गत, वैज्ञानिक सामाजिक उत्तरदायित्व योजना के तहत आणविक जीवविज्ञान प्रयोगशाला द्वारा "जैव अणुओं की संगणकीय अंतःक्रिया" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य जीवन विज्ञान के क्षेत्र में संगणकीय विधियों की अवधारणात्मक समझ को सुदृढ़ करना तथा प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना था।

कार्यशाला का मुख्य आकर्षण कोलकाता स्थित बोस संस्थान की जैविक विज्ञान विभाग की प्रोफेसर एवं जैव सूचना विज्ञान केंद्र की समन्वयक डॉ. शुभ्रा घोष दास्तिदार का विशेषज्ञ व्याख्यान रहा। उनका व्याख्यान "जैव प्रौद्योगिकी एवं औषधि अभिकल्पना में आणविक गतिकी अनुकरण : सिद्धांत एवं अनुप्रयोग" विषय पर केंद्रित था।

इस कार्यशाला में छात्रों एवं शोधार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान समय में जैव सूचना विज्ञान तथा संगणकीय जीवविज्ञान जटिल जैविक समस्याओं के समाधान में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह आयोजन युवा शोधकर्ताओं के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

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