अमृतसर , अप्रैल 21 -- राजस्थान के बूंदी जिले में एक पांचवीं कक्षा के छात्र द्वारा बाल विवाह रुकवाने की घटना ने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है।
इस बहादुरी भरे कदम की सराहना करते हुए पंजाब की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं श्री दुर्ग्याणा कमेटी की अध्यक्षप्रो लक्ष्मीकांता चावला ने मंगलवार को राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े को पत्र लिखकरइस बच्चे को सम्मानित करने की मांग की है।
प्रो चावला ने अपने पत्र में कहा कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बूंदी के एक छात्र ने अपनी स्कूल में पढ़ने वाली आठ वर्षीय बच्ची की शादी रुकवाने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर लगातार तीन बार कॉल कर मदद मांगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर बाल विवाह को रुकवाया। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि इस साहसी बच्चे को वही सम्मान दिया जाये, जो हर वर्ष 26 जनवरी को वीर बच्चों को प्रदान किया जाता है, ताकि देशभर के बच्चों को प्रेरणा मिल सके।
साथ ही उन्होंने राजस्थान में जारी बाल विवाह की समस्या पर गंभीर चिंता जतायी। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर अब भी बाल विवाह होते हैं, जो विशेषकर लड़कियों के भविष्य को अंधकार में धकेलते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त क्यों नहीं कर पा रहे हैं।
प्रो. चावला ने यह भी कहा कि बाल विवाह करवाने वाले माता-पिता, समाज के लोग और ऐसे आयोजनों में शामिल होने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जबरन कराये गयेऐसे विवाहों को कानूनी मान्यता न दी जाये। उन्होंने राजस्थान सरकार से अपील की कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़े कदम उठाये जायें, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके और समाज में एक सशक्त संदेश जाये।
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