भीलवाड़ा , मार्च 14 -- पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण संस्था पीपुल फॉर एनीमल्स के लिए प्रदेश प्रभारी एवं पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने केन्द्र सरकार से बिजली स्टोरेज प्लांट के लिए बारां जिले के शाहबाद के घने जंगल में 1.19 लाख पेड़ काटने के प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की है।
श्री जाजू ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव को ईमेल एवं पत्र भेजकर यह मांग की। उन्होंने पत्र में निजी कम्पनी ग्रीनको के पम्प्ड स्टोरेज (बिजली स्टोरेज प्लांट) के लिए 407 हेक्टेयर वन भूमि के डावयवर्जन के मामले में मंजूरी देने वाले जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध बताया है । उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों एवं वन विभाग के अधिकारियों ने मोटे भ्रष्टाचार के चलते अफरा-तफरी में सहमति देकर अपनी रिपोर्ट फाईल मंजूरी के लिए केन्द्र सरकार को भेजी है।
उन्होंने कहा कि गत 18 फरवरी को ग्रीनको कम्पनी ने पालना बिंदुओं की रिपोर्ट बारां डीसीएफ को दी और इसी दिन कम्पनी ने पैसा जमा करवा दिया तथा छह मार्च को बारां के डीसीसीएफ ने पालना रिपोर्ट सौंपी और 10 मार्च को राज्य सरकार की अनुशंषा होकर रिपोर्ट केन्द्र को सौंप दी गई है। मात्र चार दिन में सारी कार्यवाही होना यह दर्शाता है है कि मोटे पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का पर्यावरण संरक्षण के लिए 'मां के नाम एक पेड' लगाने का अभियान जारी है वहीं इस प्रोजेक्ट के लिए 1.19 लाख विशालकाय पेड़ काटे जाने से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, जलवायु संतुलन तथा क्षेत्र की पारिस्थितिकी व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। फर्स्ट शिड्यूल के दुर्लभ प्रजातियों के पशु-पक्षियों एवं वन्यजीवों के आवास स्थल नष्ट होंगे। उन्होंने इस बिजली प्लांट को अन्यत्र बंजर भूमि में स्थापित कराने का आग्रह किया।
उल्लेखनीय है कि पर्यावरण प्रेमी विठ्ठल सनाढ्य, ब्रिजेश विजयवर्गीय, प्रशान्त पाटनी सहित कई लोग पिछले डेढ़ साल से 1.19 लाख पेड़ों की कटाई को रोकने लिए आंदोलन कर रहे हैं एवं प्रधानमंत्री को पेड़ों की कटाई रोकने के लिए भीलवाड़ा से पांच हजार पेड़ एवं राजस्थान से 51 हजार पोस्टकार्ड भी लिखे गये थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित