रांची , फरवरी 25 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उत्पाद नीति को लेकर राज्य सरकार पर बड़ा निशाना साधा है।

श्री मरांडी ने तंज कसते हुए कहा कि, वाह! हमारी सरकार का क्या गजब का "टैलेंट मैनेजमेंट" है... यहाँ जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी है, उसका ओहदा भी उतना ही भारी है।

उन्होंने कहा कि 2022 में जैसे ही नई उत्पाद नीति आई, राज्य में वसूली का उत्सव शुरू हो गया। जनता एमआरपी से ज्यादा पैसे दे रही थी और विरोध करने पर दुकानों में ग्राहकों की 'कुटाई' प्रसाद के रूप में मिल रही थी। मीडिया चिल्लाता रहा, मैंने खुद सरकार की घोटाला करने से पहले और फिर घोटाला शुरू होने के साथ ही नींद तोड़ने की कोशिश की, लेकिन साहब... जब वसूली की पूरी योजना 'वहीं' से बन रही हो, वसूली का पूरा हिस्सा 'ऊपर' जा रहा हो, तो कार्रवाई कैसी?श्री मरांडी ने कहा कि अब खुलासा हो रहा है कि उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव मनोज कुमार जी के पास हर महीने 'मोटा माल' पहुँचता था। और पारदर्शिता देखिए, लेन-देन के लिए 'साले साहब' को माध्यम बनाया गया था! गुमला, चतरा और कोडरमा जैसे जिलों से अधिकारियों ने जो धन उगाही की, वह सीधे ऊपर तक पहुँची। नतीजा? सरकारी खजाने में करोड़ों का शॉर्टेज, और अधिकारियों की जेब में करोड़ों की सरप्लस।

श्री मरांडी ने आज कहा कि, सबसे मजेदार बात तो यह है कि सरकार ने इस 'प्रतिभा' को पहचाना और उन्हें प्रमंडलीय कमिश्नर और न जाने क्या-क्या बना दिया है। शायद इसलिए कि जो शराब में गबन कर सकता है, वह पूरे प्रमंडल के काम में तो पीएचडी कर ही चुका होगा! पूजा सिंघल और छवि रंजन जैसे 'नगीनों' को बर्खास्त करने के बजाय आईटी और एनएचएम की कमान सौंपी गई है, ताकि भ्रष्टाचार का सिलसिला कहीं थम न जाए।

श्री मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि ऐसे सारे 'वसूली विशेषज्ञों' को तो सीधे एसीबी के काम में एक साथ लगा देना चाहिए! ताकि ये सारे लोग एक साथ मिलकर आपका काम करते रहेंगे। आखिर बाड़ ही जब खेत को खाने में माहिर है, तो ऐसे लोगों को उस बाड़ का इंचार्ज बनाना ही सबसे बड़ी 'क्रांति' होगी। आखिर आपको भी तो ऐसे ही 'सक्षम' और 'निपुण' सिपहसालारों की जरूरत है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित