मुंबई , फरवरी 02 -- महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की 2024 में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले के आरोपी गौरव विलास अपुणे ने सोमवार को जमानत के लिए बॉम्बे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

श्री अपुणे के वकील आशुतोष श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से अन्य आरोपियों के कथित कबूलनामे और कॉल डिटेल रिकॉर्ड पर आधारित है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को कथित संगठित अपराध गिरोह या राजनीतिक नेता की हत्या से सीधे जोड़ने वाला कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है और न ही कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामदगी हुई है।

श्री श्रीवास्तव ने कहा, "हम आरोप पत्र और प्रासंगिक दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। हालांकि जांच में एक संगठित गिरोह के शामिल होने का आरोप लगाया गया है, लेकिन कानून केवल कहानी या कथित जुड़ाव के आधार पर किसी की स्वतंत्रता को छिनने की अनुमति नहीं देता है। चूंकि मामला विचाराधीन है, इसलिए आगे टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।"श्री अपुणे को 2024 में दर्ज एक प्राथमिकी के सिलसिले में अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के जासूसी शाखा द्वारा पुणे से गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में सरकार ने अनमोल लोविंदर बिश्नोई उर्फ भाईजी, एबी भाई और भानु के नेतृत्व वाले एक संगठित आपराधिक गिरोह के अस्तित्व का आरोप लगाया है। जांच एजेंसियों ने इस गिरोह को बाबा सिद्दीकी की हाई-प्रोफाइल हत्या सहित कई गंभीर अपराधों से जोड़ा है।

मामले के विवरण के अनुसार, श्री अपुणे और अन्य सह-आरोपियों को 6 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। वह 16 दिसंबर 2024 तक 41 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में रहे और 17 दिसंबर 2024 से न्यायिक हिरासत में हैं। वह वर्तमान में मुंबई की एक विशेष अदालत में वर्ष 2025 के महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

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