देवबंद (सहारनपुर) , फरवरी 12 -- सात्विक खानपान के लिए विश्वभर में विख्यात मिरगपुर गांव में गुरुवार को बाबा फकीरादास की सिद्ध कुटी पर परंपरागत भव्य मेले का आयोजन किया गया। मेले में आसपास ही नहीं बल्कि दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और प्रसाद चढ़ाकर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मन्नतें मांगीं।
सुबह सिद्ध कुटी पर हवन-पूजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद बाबा के दर्शन और प्रसाद अर्पित करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मान्यता है कि इस दिन मिरगपुर गांव के प्रत्येक परिवार के रिश्तेदार एकत्र होकर विधिवत बाबा के दर्शन करते हैं। परंपरा के अनुसार गांव के प्रत्येक घर में देशी घी का हलवा और पेड़े का प्रसाद भी बनाया और वितरित किया गया।
मेले का महत्व इस बात से भी जुड़ा है कि इस अवसर पर गांव की सभी बहू-बेटियां और रिश्तेदार अपने मायके पहुंचकर कार्यक्रम में सहभागिता करते हैं। मंदिर प्रांगण में लगे मेले का श्रद्धालुओं और आगंतुकों ने भरपूर आनंद उठाया। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक, सभी मेहमानों की आवभगत में जुटे नजर आए।
जानकारी के अनुसार देवबंद से करीब छह किलोमीटर दूर काली नदी के किनारे ऊंचे टीले पर स्थित बाबा फकीरादास की सिद्ध कुटी का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि मुगल सम्राट जहांगीर के शासनकाल में राजस्थान निवासी सिद्ध पुरुष बाबा फकीरादास भ्रमण करते हुए मिरगपुर आए थे। उन्होंने गांववासियों को सात्विक जीवन अपनाने, नशामुक्त रहने तथा मांसाहार, तंबाकू और शराब से दूर रहने का संदेश दिया था। बाबा के उपदेशों और चमत्कारों से प्रभावित होकर गांववासियों ने उनके बताए मार्ग को अपनाने का संकल्प लिया, जिसका पालन आज भी किया जा रहा है।
हर वर्ष फागुन माह की दशमी को गुरु पर्व के अवसर पर सिद्ध कुटी पर यह वार्षिक मेला आयोजित होता है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत देशी घी के हलवे और शुद्ध मावे के पेड़ों से किया गया। तड़के से ही सिद्ध कुटी पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, जो देर शाम तक जारी रहा।
अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण मिरगपुर गांव देशभर में भारतीय संस्कृति और सात्विक खानपान की अनूठी मिसाल माना जाता है। यह गांव भारत के राष्ट्रपति द्वारा आदर्श गांव के सम्मान से सम्मानित हो चुका है और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है। गांव की अधिकांश आबादी हिंदू गुर्जर बिरादरी से संबंधित है, जो खेतीबाड़ी में प्रगतिशील मानी जाती है। यहां मुख्य रूप से गन्ना और गेहूं की खेती होती है।
गांव की सात्विकता से पद्मश्री संत स्वामी कल्याण देव जी महाराज भी अत्यंत प्रभावित रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. राजेश पायलट, पूर्व मंत्री स्व. यशपाल सिंह और पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. चौ. नारायण सिंह समेत अनेक जनप्रतिनिधि भी सिद्ध कुटी पर मत्था टेकते रहे हैं। आज भी विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक वर्गों के लोग इस मेले में पहुंचकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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