दन्तेवाड़ा , मार्च 17 -- छत्तीसगढ़ के दन्तेवाड़ा वनमंडल में वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शावक बाघ और तेंदुए की खाल बरामद कर एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश कर नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें डिप्टी रेंजर भी शामिल है।

ये सभी आरोपी जिला दंतेवाड़ा और बीजापुर के निवासी आरोपी हैं। इस मामले में बाघ और तेंदुए के अन्य अंगों की बरामदगी शेष है।

दंतेवाड़ा के रेंज अधिकारी प्रीतेश पाण्डेय ने बुधवार को बताया कि बाघ और तेंदुआ का शिकार दो-तीन महीने पहले किया गया था। शिकारियों ने फंदा लगाकर शावकों को शिकार किया और सबसे पहले शावकों के हाथ- पैर काटे गए। फिलहाल सिर्फ खालों की बरामदगी हुई है। दांत और नाखून जैसे अंगों की बरामदगी होना बाकी है। रेंज अधिकारी आगामी दिनों में शावकों की हत्या और तस्करी में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना जतायी है।

वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार मध्यरात्रि को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दन्तेवाड़ा से बालूद मार्ग पर कुछ लोग बाघ की खाल लेकर जा रहे हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग की संयुक्त टीम ने योजना बनाकर क्षेत्र में घेराबंदी की। इस अभियान में दन्तेवाड़ा वनमंडल, बीजापुर वनमंडल, इंद्रावती टाइगर रिजर्व बीजापुर, बस्तर वनमंडल, राज्य तथा वृत्त स्तरीय उड़नदस्ता दल और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की टीम शामिल रही। संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को बाघ की खाल के साथ मौके पर पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान वन्यजीव अंगों की तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। आरोपियों की निशानदेही पर वन विभाग ने आगे कार्रवाई करते हुए अन्य संदिग्धों की तलाश शुरू की।जांच के दौरान मुख्य आरोपी लक्ष्मण तेलाम पिता लखमा तेलाम (51), देवीराम ओयाम पिता जग्गूराम ओयाम (58), रमेश कुड़ियाम (24) पिता सुकलू कुड़ियाम, फरसोन पोयामी (27) पिता बामन पोयामी, सेमला रमेश (24) पिता सोमा, सुखराम पोड़ियाम (21) पिता पोदिया पोड़ियाम तथा छन्नू कुड़ियाम (35) पिता पांडू कुड़ियाम को भी गिरफ्तार किया गया।

आरोपियों की निशानदेही पर वन विभाग की विशेष टीम ने ग्राम केशापुर में छापा मारा। तलाशी के दौरान एक अन्य स्थान से तेंदुए की एक खाल भी बरामद की गई। इस मामले में मासो ओयाम पिता सुखमन ओयाम (50) तथा अर्जुन भोगामी (42) पिता सोनकू भोगामी को भी गिरफ्तार किया गया। मंगलवार को अदालती आदेश पर सभी नौ आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।

वनमंडलाधिकारी दन्तेवाड़ा ने बताया कि बरामद बाघ और तेंदुआ दोनों ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 के अंतर्गत अत्यंत संरक्षित श्रेणी में आते हैं। ऐसे वन्यजीवों का शिकार करना, उनके अंगों का व्यापार करना या उन्हें रखना गंभीर अपराध है।मामले में वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 9, धारा 39(1)(घ), धारा 3 (क), (ख), (ग) तथा धारा 48 सहित संशोधित प्रावधानों के तहत प्रारंभिक अपराध प्रकरण क्रमांक 15452/25 दिनांक 17 मार्च 2026 को दर्ज किया गया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित