नयी दिल्ली , मार्च 16 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2024-25 के अंतिम और 2025-26 के प्रथम अग्रिम बागवानी अनुमान सोमवार को जारी कर दिए। इनके अनुसार देश में फलों, सब्जियों, मसालों और औषधीय पौधों की पैदावार में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

मंत्रालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि देश में कुल बागवानी फसलों का क्षेत्रफल वर्ष 2023-24 के 290.86 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 301.36 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो 10.50 लाख हेक्टेयर (3.61 प्रतिशत) की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।

इसी अवधि में कुल बागवानी पैदावार भी 3547.44 लाख टन से बढ़कर 3707.38 लाख टन पहुँच गई है। वर्ष 2025-26 के लिए यह पैदावार 3708.46 लाख टन होने का अनुमान है। इससे पता चलता है कि देश में बागवानी फसलों को लेकर किसानों का रूझान बढ़ रहा है।

इसमें बताया गया है कि फलों और सब्जियों की पैदावार वर्ष 2024-25 में 4.13 प्रतिशत बढ़कर 1176.49 लाख टन रही। इसमें मुख्य रूप से केला, आम, पपीता और अमरूद का योगदान रहा।

इसी तरह सब्जियों की पैदावार 5.11 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2177.97 लाख टन होने का अनुमान है। प्याज की पैदावार में 26.79 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो 242.67 लाख टन से बढ़कर 307.67 लाख टन पहुँच गई है। आलू की पैदावार भी बढ़कर 585.71 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि टमाटर की पैदावार 2025-26 में 227.02 लाख टन तक पहुँचने की संभावना है।

उच्च मूल्य वाली फसलों के क्षेत्र में भी बड़ी बढ़त देखी गई है। सुगंधित एवं औषधीय पौधों की पैदावार 2024-25 में 9.01 लाख टन अनुमानित है। फूलों की पैदावार में 20.65 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे यह 35.35 लाख टन से बढ़कर 42.65 लाख टन तक पहुँच गई है।

मसालों की पैदावार भी 4.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 129.93 लाख टन रही है, जिसमें जीरा, अदरक, लहसुन और हल्दी की मुख्य भूमिका रही। नारियल, काजू, रबड़, चाय और कॉफी जैसी रोपण फसलों की वर्ष 2025-26 में पैदावार 5.82 प्रतिशत बढ़कर 179.68 लाख टन होने की संभावना है।

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