जयपुर , दिसम्बर 02 -- राजस्थान के लोकभवन में मंगलवार को उत्तराखंड, झारखंड, असम और नागालैंड का स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। इस दौरान राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने इन प्रदेशों के निवासियों से संवाद कर उन्हें स्थापना दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी। श्री बागडे ने कहा कि राजस्थान की धरती आत्मीयता से जुड़ी है, यहां आरम्भ से ही भक्ति और अध्यात्म की परम्परा है। इसीलिए यहां के लोग मिलनसार हैं। उन्होंने विभिन्न राज्यों के निवासियों से संवाद करते हुए कहा कि वे अपने राज्यों के विकास के साथ राजस्थान के विकास में भी सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि 'लोकभवन' में राज्यों के स्थापना दिवस मनाने का उद्देश्य यही है कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को साक्षात हम सभी महसूस कर सकें।

राज्यपाल ने विभिन्न राज्यों की विशेषताओं के साथ वहां के लोगों के राष्ट्र प्रेम की चर्चा करते हुए कहा कि भाषा, रहन-सहन, खान-पान में भले ही सब अलग-अलग हों, लेकिन मन से हम सभी भारतीय हैं। उन्होंने उत्तराखंड को देवभूमि बताते हुए कहा कि आदि शंकराचार्य ने तीर्थ परम्परा की शुरूआत उत्तराखंड के तीर्थों से ही की। इसके पीछे मकसद यही था कि लोग घरों से बाहर निकले और दूसरे स्थानों को जानें। उन्होंने झारखंड को खनिज संपदा से समृद्ध बताते हुए वहां आजादी के लिए लड़ी गई लड़ाई और धरती आबा कहे जाने वाले बिरसा मुंडा को याद किया। उन्होंने कहा कि असम पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार है। ब्रह्मपुत्र के साथ कामाख्या का पावन शक्तिपीठ असम में है। उन्होंने नागालैण्ड के जनजातीय जीवन और वहां प्रकृति से जुड़े सरोकारों की भी चर्चा की। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डा पृथ्वी भी मौजूद थे।

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