पटना , फरवरी 25 -- बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बुधवार को कहा कि बिहार अब केवल कच्चा बांस उपलब्ध कराने वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि नर्सरी, रोपण, वैज्ञानिक प्रबंधन, कटाई-उपचार, प्राथमिक प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, फर्नीचर, अगरबत्ती स्टिक, पैकेजिंग तथा विपणन तक पूरी मूल्य-श्रृंखला विकसित की जाएगी।

कृषि मंत्री श्री यादव ने आज पटना स्थित कृषि भवन के सभागार में एक दिवसीय 'बिहार बांस अर्थव्यवस्था शिखर सम्मेलन 2026' का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य राज्य के बांस क्षेत्र को गाँव-आधारित आजीविका, स्वरोजगार, मूल्य संवर्धन तथा बाजार से जोड़कर हरित एवं समावेशी आर्थिक विकास को गति देना है।सम्मेलन में बांस आधारित उद्योग, प्रसंस्करण, विपणन तथा मूल्य-श्रृंखला विकास पर व्यापक विमर्श हुआ।

मंत्री श्री यादव ने इस अवसर पर कहा कि "बांस केवल एक पौधा नहीं, बल्कि गरीब और छोटे किसानों के लिए 'हरा बचत खाता' है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि अब बिहार का लक्ष्य बांस को घरेलू उपयोग से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक, संगठित और बाजार-उन्मुख उद्योग के रूप में विकसित करना है, जिससे यह स्थायी आय और सम्मानजनक जीवन का आधार बन सके।उन्होंने कहा कि बिहार अब केवल कच्चा बाँस उपलब्ध कराने वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि नर्सरी, रोपण, वैज्ञानिक प्रबंधन, कटाई-उपचार, प्राथमिक प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, फर्नीचर, अगरबत्ती स्टिक, पैकेजिंग तथा विपणन तक पूरी मूल्य-श्रृंखला विकसित की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार सृजन होगा, बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और आय का बड़ा हिस्सा सीधे उत्पादक परिवारों तक पहुंचेगा।

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