जयपुर , मार्च 24 -- राजस्थान के वागड़ अंचल में सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने और बिजली उत्पादन में अहम योगदान निभाने वाला माही बांध अब पर्यटन के नए आयाम भी स्थापित करेगा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बांसवाड़ा जिले के माही बांध के भराव क्षेत्र में स्थित अनुपम प्राकृतिक धरोहर 'हण्ड्रेड आइलेंड्स' और आसपास की भूमि पर सुनियोजित पर्यटन विकास हो सकेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने क्षेत्र को पर्यटन पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग ने उच्चस्तरीय समिति गठन किया है। यह समिति बांध क्षेत्र में पर्यटन विकास के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करेगी। इसके जरिए नियंत्रित और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन गतिविधियां विकसित की जा सकेंगी। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

समिति माही बांध के जल भराव क्षेत्र, आइलैंड्स एवं आसपास की राजकीय और निजी भूमि के भूमि-उपयोग निर्धारण, डिमार्केशन, लीज एवं आवंटन, वाटर स्पोर्ट्स एवं पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए नियम, दिशा निर्देश तैयार करेगी। साथ ही जल के सदुपयोग को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रकार के प्रदूषण नहीं होने और पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेगी।

माही बैक वाटर में फैले टापू, चारों ओर हरियाली और पहाड़ियों से घिरा यह इलाका पहले ही पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। 'सिटी ऑफ हंड्रेड आइलेंड्स' के रूप में पहचान बना चुके इस क्षेत्र में वाटर एक्टिविटीज, नेचर-बेस्ड टूरिज्म, व्यू-पॉइंट और अन्य आकर्षण विकसित किए जा सकेंगे। राज्य सरकार के इस सुनियोजित प्रयास से यह क्षेत्र न केवल राजस्थान बल्कि देश के प्रमुख इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में उभरेगा।

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि माही बांध का विकास संतुलित, पर्यावरण-अनुकूल और राजस्व संवर्धन से हो सकेगा। आने वाले समय में एक ऐसा मॉडल विकसित होगा, जिससे क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और जल संरक्षण के उद्देश्यों की पूर्ति हो सकेगी। यह प्रयास माही क्षेत्र को नई पहचान देने के साथ अंचल के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

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