बांदा , मार्च 16 -- उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के परम ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व वाले कालिंजर दुर्ग के पहाड़ी क्षेत्र को राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल घोषित किया गया है।
भारतीय भू‑वैज्ञानिक सर्वेक्षण (उत्तरी क्षेत्र) के अपर महानिदेशक व विभागाध्यक्ष राजिंदर कुमार ने सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में भारतीय भू-विरासत स्थल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कालिंजर दुर्ग के पहाड़ी क्षेत्र को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल घोषित किया गया।
श्री कुमार ने बताया कि कालिंजर किला क्षेत्र एक महत्वपूर्ण भू-वैज्ञानिक घटना "एपार्कियन अनकॉनफॉर्मिटी" का प्रमाण है। यहां की लगभग 2.5 अरब वर्ष पुरानी बुंदेलखंड ग्रेनाइट तथा लगभग 1.2 अरब वर्ष पुराने कैमूर बलुआ पत्थर करोड़ों वर्षों के भू-वैज्ञानिक इतिहास को दर्शाते हैं।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि इस क्षेत्र की विशिष्ट भू-आकृति ने ऐतिहासिक राजवंशों को सामरिक सुरक्षा प्रदान की थी। किले की दीवारों में प्रयुक्त स्थानीय पत्थर यहां की अद्वितीय भू-सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है। कालिंजर के भू-विरासत स्थल घोषित होने से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और खजुराहो तथा चित्रकूट के साथ इस क्षेत्र का पर्यटन विकास भी तेज होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा इस स्थल के संरक्षण और जनजागरण के उद्देश्य से विशेष सूचना बोर्ड भी स्थापित किया गया है, जो इसके भू-वैज्ञानिक महत्व को दर्शाता है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में नरैनी के विधायक ओम मणि वर्मा, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के उप महानिदेशक विमल प्रकाश गौड़, निदेशक हेमंत कुमार, प्रभारी निदेशक देवाशीष शुक्ला, वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक मयंक साहू सहित जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारी, पुरातत्वविद और कालिंजर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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