हल्द्वानी , मार्च 12 -- उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित जमरानी बांध परियोजना के तहत नहरों के आधुनिकीकरण और नई नहरों के निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, करीब 3800 करोड़ रुपये की लागत से गौला नदी पर बन रही इस परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बड़े क्षेत्र को सिंचाई सुविधा और पेयजल उपलब्ध कराना है।
गुरुवार को परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार जमरानी बांध को काठगोदाम बैराज से हरिपुरा जलाशय तक जोड़ने के लिए करीब 41 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण और आधुनिकीकरण किया जाना है। अब तक लगभग 15 से 16 किलोमीटर नहर का कार्य पूरा किया जा चुका है,पहले चरण में 33.5 किलोमीटर नहर निर्माण के लिए टेंडर जारी होने के बाद कार्य भी शुरू कर दिया गया है, जबकि शेष 7.5 किलोमीटर नहर निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि नई नहरों को आधुनिक तकनीक से चौड़ा और मजबूत बनाया जा रहा है। इन नहरों की अधिकतम गहराई लगभग छह फुट रखी जा रही है, जिसके माध्यम से जमरानी बांध से हरिपुरा जलाशय तक पानी पहुंचाया जाएगा। जमरानी बांध परियोजना के महाप्रबंधक महेश खरे ने बताया कि नहर निर्माण के लिए पहले चरण में 246 लोगों को अतिक्रमण हटाने के लिए पहली बार नोटिस जारी किया गया, जबकि 98 लोगों को दूसरी बार नोटिस दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि दूसरे चरण के टेंडर खुलने के बाद हल्द्वानी शहर के अंदर सौरभ होटल से तीनपानी तक करीब 7.5 किलोमीटर क्षेत्र में अतिक्रमण चिन्हित कर लिया गया है और इसे हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत बनने वाली नहरों का निर्माण कार्य जनवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जानकारी के अनुसार जमरानी बांध 150.60 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध होगा, जिसके तहत दो नई फीडर नहरों का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना के पूर्ण होने पर कुल 57,065 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। इसमें उत्तराखंड के 9,458 हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश के 47,607 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल हैं।
इसके अलावा इस परियोजना के माध्यम से हल्द्वानी शहर के लिए दीर्घकालिक पेयजल व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। योजना के तहत लगभग 4.2 करोड़ घन मीटर पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों की 10 लाख से अधिक आबादी को लाभ मिलने की संभावना है।
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