जगदलपुर , फरवरी 25 -- छत्तीसगढ़ में आजीविका संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड से आई 50 महिलाओं की एक टीम ने बस्तर जिले का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य बस्तर की महिला समूहों द्वारा संचालित सफल एकीकृत कृषि मॉडल (इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर) को समझकर जानकारी हासिल करना था ताकि उन्हें बिलासपुर की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों में लागू किया जा सके।

जिला जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) से प्राप्त जानकारी के अनुसार,भ्रमण कार्यक्रम की शुरुआत जनपद पंचायत जगदलपुर के सभागार में एक विस्तृत तकनीकी सत्र के साथ हुई। इस सत्र में प्रतिभागियों को प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया गया कि कैसे बस्तर में एकीकृत खेती क्लस्टर का क्रियान्वयन किया गया है। अधिकारियों ने किसानों के चयन की वैज्ञानिक प्रक्रिया, समूह-आधारित कार्यप्रणाली और उप-समितियों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बिलासपुर से आई 'दीदियों' को आजीविका सेवा केंद्रों द्वारा प्रदान की जाने वाली तकनीकी सहायता और संसाधनों के बारे में भी अवगत कराया गया, जिससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि एक मजबूत संस्थागत ढांचा किस तरह ग्रामीण अर्थव्यस्था को सुदृढ़ बना सकता है।

सैद्धांतिक जानकारी के बाद, प्रतिभागियों ने लोहंडीगुड़ा और तोकापाल ब्लॉकों का दौरा कर जमीनी स्तर पर चल रही गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। दल ने सबसे पहले एक उन्नत मुर्गी पालन इकाई का भ्रमण किया, जहाँ ब्रुडिंग सेंटर की बारीकियों, मुर्गियों के आहार प्रबंधन और टीकाकरण कार्यक्रम को बारीकी से समझा। इसके साथ ही, उन्होंने देखा कि कैसे एक ही परिसर में मछली पालन और बकरी पालन को एकीकृत किया गया है, जिससे किसानों को आय के कई स्रोत उपलब्ध हो रहे हैं।

इस यात्रा का सबसे प्रभावशाली हिस्सा बस्तर की महिला किसानों द्वारा अपनाई गई उन्नत सब्जी उत्पादन तकनीकों को देखना रहा। बिलासपुर की महिलाओं ने नर्सरी प्रबंधन, जैविक कीट नियंत्रण और फसल चक्र के मॉडल का गहन अध्ययन किया। उन्होंने यह भी जाना कि उत्पादन के बाद ग्रेडिंग और पैकेजिंग कैसे की जाती है, और कैसे ये महिलाएं स्थानीय मंडियों से सीधे जुड़कर बिचौलियों को दरकिनार कर अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर रही हैं।

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