दंतेवाड़ा , अप्रैल 08 -- छत्तीसगढ़ में बस्तर के आदिवासी परिवारों के तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फंसे होने के मुद्दे पर उनके पुनर्वास को लेकर प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। इस संबंध में कलेक्टरेट में आयोजित बैठक में पुनर्वास की रणनीति और समस्याओं के समाधान पर चर्चा की गई।
जिला पीआरओ से आज मिली जानकारी के अनुसार माओवाद के चरम दौर में भय के कारण दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के सीमावर्ती इलाकों से हजारों आदिवासी परिवार पलायन कर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बस गए थे। अब सुरक्षा परिस्थितियों में सुधार के बाद राज्य शासन इन परिवारों को उनके मूल गांवों में बसाने के प्रयास कर रहा है। इसके लिए व्यापक सर्वेक्षण कराया गया, जिसमें सामने आया कि बस्तर संभाग के 6,939 परिवारों के 31,098 सदस्य अब भी अन्य राज्यों में निवासरत हैं।
बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जो परिवार वापस बस्तर आना चाहते हैं, उनके लिए भूमि, आवास, रोजगार और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। वहीं जो परिवार वर्तमान में अन्य राज्यों में ही रहना चाहते हैं, उनके लिए संबंधित राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक दस्तावेज और सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
प्रवासित परिवारों के प्रतिनिधियों ने चर्चा के दौरान बताया कि उन्हें जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जमीन के पट्टे नहीं मिलने से सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कुछ परिवारों ने यह भी कहा कि यदि उन्हें पर्याप्त सुविधाएं मिलें तो वे अपने मूल स्थान पर लौटना चाहते हैं।
बैठक में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के निर्देशों और सुझावों पर भी विचार किया गया। आयोग ने पुनर्वास के लिए न्यूनतम भूमि आवंटन, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की अनुशंसा की है। साथ ही पुनर्वास नीति 2025 में संशोधन कर प्रवासित परिवारों को शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
प्रशासन ने भरोसा दिलवाया कि सभी समस्याओं को संकलित कर केंद्र और राज्य शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी, ताकि प्रभावित परिवारों के लिए ठोस समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में बस्तर संभाग आयुक्त डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी., कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव, कलेक्टर अमित कुमार, जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे, जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा, अपर कलेक्टर राजेश पात्रे, एडिशनल एसपी आर.के. बर्मन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित