जगदलपुर , मार्च 03 -- छत्तीसगढ़ में जगदलपुर के आड़ावाल स्थित लाइवलीहुड कॉलेज में उम्मीदों की एक नई सुबह देखी गई, जब अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह विभाग मनोज पिंगुआ और कलेक्टर आकाश छिकारा ने वहां प्रशिक्षण ले रहे युवाओं से मुलाकात की। यह दौरा महज एक निरीक्षण नहीं, बल्कि उन 28 आत्मसमर्पित युवाओं के हौसलों को सलाम करने का अवसर था, जिन्होंने बंदूक छोड़कर अब हाथों में वेल्डिंग मशीन और तकनीकी औजार थाम लिए हैं।
जिला पीआरओ से आज मिली जानकारी के अनुसार,लाइवलीहुड कॉलेज के गलियारों में घूमते हुए अधिकारियों ने देखा कि कैसे बीजापुर के ये युवा अपनी पुरानी पहचान पीछे छोड़, पसीने की बूंदों से स्वावलंबन की इबारत लिख रहे हैं। संवाद के दौरान जब अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने उनके अनुभवों के बारे में पूछा, तो युवाओं के चेहरों पर एक निश्चिंत मुस्कान बिखर गई। वे अब न केवल वेल्डिंग की बारीकियां सीख रहे हैं, बल्कि उनके सपनों में अब खुद की दुकान और स्वरोजगार के रंग भरने लगे हैं।
प्रशिक्षणार्थियों ने उत्साह के साथ बताया कि वे अब पूरी तरह तैयार हैं कि अपने गांव लौटकर स्वयं का व्यवसाय शुरू करें और समाज की मुख्यधारा में सिर उठाकर जिएं। उनके अनुशासित जीवन, खेलकूद और सीखने की ललक को देखकर अधिकारियों ने भी उनकी जमकर सराहना की।
अतिरिक्त मुख्य सचिव पिंगुआ ने इस बदलाव को 'बस्तर की नई पहचान' करार देते हुए कहा कि तकनीकी कौशल ही वह जादुई चाबी है, जो आत्मनिर्भरता के बंद दरवाजों को खोलती है। कलेक्टर आकाश छिकारा ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि बाजार की मांग के अनुरूप उनका यह हुनर उन्हें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखने देगा। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन और अपर कलेक्टर सीपी बघेल भी उपस्थित थे।
यह पहल बस्तर के उन युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है, जो कभी हिंसा की राह पर चल पड़े थे, लेकिन आज हुनर के दम पर अपनी और अपने परिवार की जिंदगी संवारने में जुटे हैं।
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