सुकमा , जनवरी 24 -- छत्तीसगढ़ में एसआईआर और धान खरीदी में आ रही समस्याओं के विरोध में बस्तरिया राज मोर्चा ने बस स्टैंड परिसर में एक दिवसीय धरना दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन के संभागीय संयोजक मनीष कुंजाम ने कहा कि आदिवासी इलाकों में हो रही संगठित घुसपैठ पर अगर समय रहते अंकुश नहीं लगा, तो स्थानीय आदिवासी अल्पसंख्यक बन जाएंगे। उन्होंने कांकेर जिले के पखांजुर आदि इलाकों का उदाहरण देते हुए बताया कि बस्तर के बहुत से इलाकों में हो रही घुसपैठ के चलते यहां आदिवासियों के अल्पसंख्यक हो जाने का खतरा मंडराया हुआ है।

उन्होंने कहा कि उनका विरोध किसी समुदाय विशेष से नहीं, बल्कि ओडिशा के रास्ते योजनाबद्ध तरीके से आकर बसने और जमीन पर कब्जा जमाने की प्रवृत्ति से है। कुंजाम ने आरोप लगाया कि यह सब राजनीतिक संरक्षण में हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि कोंटा, पखांजूर जैसे इलाकों की तरह पूरे बस्तर में आदिवासियों की स्थिति खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से एसआईआर के दौरान कड़ी जांच और मतदाता सूची में नाम जोड़ने से पहले सख्त सत्यापन की मांग की।

कुंजाम ने सरकार पर वोट बैंक की राजनीति करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय घुसपैठ का मुद्दा उठाया जाता है, लेकिन आदिवासी इलाकों में हो रही वास्तविक घुसपैठ पर सरकार चुप रहती है। उन्होंने कहा कि अगर अगले दो सप्ताह तक बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासियों के नाम मतदाता सूची में नहीं जुड़े, तो इसकी जिम्मेदार सरकार होगी।

धान खरीदी को लेकर भी सरकार को घेरा गया। कुंजाम ने कहा कि तकनीकी दिक्कतों के चलते अगर एक भी किसान का धान नहीं बिक पाया, तो यह सरकार की सीधी असफलता है। उन्होंने बताया कि बस्तर के कई वन क्षेत्रों में गिरदावरी, इंटरनेट और जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण किसान धान बेचने से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की।

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