बरेली , मार्च 20 -- उत्तर प्रदेश के बरेली में बीएल एग्रो समूह ने देश में पहली बार बड़े पैमाने पर स्वदेशी गायों में एम्ब्रियो ट्रांसफर कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित किया। यह उपलब्धि लीड्स जेनेटिक्स के सहयोग से हासिल की गई और भारतीय डेयरी उद्योग में उत्पादकता और गुणवत्ता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पहले चरण में दिसंबर 2025 में 116 गायों में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक का प्रयोग किया गया, जिसमें 70 प्रतिशत सफलता दर हासिल हुई। दूसरे चरण में 160 गायों, जिनमें गिर, साहीवाल और एचएफ क्रॉस नस्लें शामिल थीं, में सफलतापूर्वक भ्रूण स्थानांतरण किया गया। विशेष रूप से गिर गायों की उच्च दूध उत्पादन क्षमता और रोग प्रतिरोधकता इस कार्यक्रम के केंद्र में रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाले जीन वाली गायों की संख्या तेजी से बढ़ाई जा सकती है, जिससे प्रति गाय दूध उत्पादन में तीन गुना तक वृद्धि संभव है। इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत और ब्राज़ील के बीच तकनीकी सहयोग है। यह कार्यक्रम ब्राज़ील की एम्ब्रापा , फजेन्डा फ्लोरेस्टा और लीड्स जेनेटिक्स के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत संचालित किया गया। यह पहली बार है जब एम्ब्रापा ने भारत में किसी निजी कंपनी के साथ इस स्तर का समझौता किया है।

विशेषज्ञ इसे भारत में पशुधन आनुवंशिकी और डेयरी क्षेत्र में संभावित क्रांति के रूप में देख रहे हैं।

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