मुरैना , दिसम्बर 18 -- अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के कल 98वें शहादत दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुरैना जिले स्थित उनके पैतृक गांव बरबई में स्थानीय लोग मशाल यात्रा के माध्यम से पंडित बिस्मिल का स्मरण करेंगे।

स्वतंत्रता सेनानी पंडित बिस्मिल का पैतृक गांव मुरैना जिले में बरबई है, जहाँ आज भी उनके पूर्वज रहते हैं। पारिवारिक विवाद के कारण उनके दादा नारायण लाल शाहजहाँपुर चले गए, लेकिन पंडित बिस्मिल कई बार छिपने और क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए बरबई लौटे। यहीं उन्होंने रूसी क्रांति पर पुस्तक का हिंदी अनुवाद लिखा। यही कारण है कि यहां उनकी स्मृति में एक मंदिर भी है।

मैनपुरी षड्यंत्र (1918-19) के बाद भी पंडित बिस्मिल दो साल तक अपने पैतृक गांव बरबई में गुप्त रूप से रहे। बरबई में रहते हुए, 1920 में उन्होंने प्रसिद्ध अंग्रेजी पुस्तक "ग्रैंड मदर ऑफ रशियन रिवोल्यूशन" का हिंदी में अनुवाद किया। बरबई में आज भी उनके परिवार और वंशजों का घर है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि बरबई सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि पंडित बिस्मिल के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जहाँ उन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए खुद को तैयार किया और अपने पैतृक जुड़ाव को जीवित रखा।

पंडित बिस्मिल को काकोरी षड्यंत्र (9 अगस्त 1925) में शामिल होने के कारण फांसी दी गई थी। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें और उनके कई साथियों को काकोरी रेलवे स्टेशन से ब्रिटिश खजाने को लूटने के आरोप में दोषी ठहराया था। उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के सदस्यों के साथ मिलकर 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के पास काकोरी रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन लूटी, जिसमें ब्रिटिश सरकार का खजाना था। इस घटना के बाद, बिस्मिल और उनके कई साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया। लंबी कानूनी कार्यवाही के बाद, ब्रिटिश सरकार ने उन्हें देशद्रोह के आरोप में मौत की सजा सुनाई। 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में बिस्मिल को फांसी दे दी गई। अशफाक उल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह को भी इसी मामले में फांसी दी गई थी।

इसी बीच कल मुरैना के डाइट भवन परिसर में पंडित बिस्मिल की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इसके पश्चात ध्वजारोहण, उनके परिजन का सम्मान, गार्ड ऑफ ऑनर एवं तोपों की सलामी दी जाएगी। डाइट भवन परिसर में पूजा-अर्चना के उपरांत मशाल यात्रा निकलेगी, जो दिमनी और अम्बाह होते हुए बरबई पहुंचेगी, जहां एक आमसभा का आयोजन किया जाएगा।

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