वाराणसी , मार्च 8 -- वाराणसी के अस्सी घाट से संचालित सुबाह-ए-बनारस पहल के तहत काशी की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म 'आकाशा दर्शन' की शुरुआत की जा रही है। 'डिवाइन नेक्टर' आध्यात्मिक पहल के अंतर्गत अस्सी घाट पर एक संकल्प लिया गया, जिसके माध्यम से काशी से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों को डिजिटल माध्यम से दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस प्रयास के तहत आकाशा दर्शन को तकनीकी सहयोग मंच के रूप में जोड़ा गया है, जिसका उद्देश्य भारत के विभिन्न पवित्र स्थलों से जुड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभवों को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराना है।

प्लेटफॉर्म के शुरुआती चरण में श्रद्धालु अपने नाम से विशेष अनुष्ठानों के आयोजन का अनुरोध कर सकेंगे, जिनका प्रमाणित वीडियो उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही जहां संभव होगा, संबंधित धार्मिक प्रसाद या पूजन सामग्री भी उन्हें भेजी जा सकेगी।

इस पहल को डॉ. रत्नेश वर्मा की परिकल्पना से प्रेरणा मिली है, जो लंबे समय से काशी के घाटों से जुड़ी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और प्रसार के लिए कार्य कर रहे हैं। तकनीकी सहयोग संज़ीव मेहता के नेतृत्व में मिल रहा है, जिन्हें वैश्विक बैंकिंग और डिजिटल इकोसिस्टम में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

कार्यक्रम के संचालन और समन्वय के लिए मेरीएमी टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को स्वतंत्र फुलफिलमेंट और कोऑर्डिनेशन पार्टनर बनाया गया है, जिसका नेतृत्व चीफ बिजनेस ऑफिसर विकास मल्होत्रा कर रहे हैं।

इस संबंध में मेरीएमी टेक्नोलॉजीज ने आश्रय सेवा संस्थान के साथ औपचारिक समझौता किया है, जिसका प्रतिनिधित्व डॉ. वीरेन्द्र प्रताप सिंह कर रहे हैं। इस सहयोग के तहत गंगा आरती, यज्ञ, जल अर्पण और दीप अर्पण जैसे पारंपरिक अनुष्ठानों को डिजिटल माध्यम से वैश्विक प्रतिभागियों तक पहुंचाने की योजना है।

इस पहल का उद्देश्य काशी की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जिम्मेदारी के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करना और वैश्विक स्तर पर लोगों को इससे जोड़ना है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित