नयी दिल्ली/नोएडा , फरवरी 04 -- देश में कैंसर के बढ़ते मामलों का कारण बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही से अब यह बीमारी कम उम्र के लोगों को भी अपनी चपेट में ले रही है।
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर विशेषज्ञ चिकित्सकों ने इस पर गंभीर चिंता जताई और लोगों से समय पर जांच और सही इलाज अपनाने की अपील की।
इस अवसर पर फोर्टिस नोएडा के निदेशक, मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. रजत बजाज ने बताया कि महिलाओं में सबसे अधिक स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। कुल नए कैंसर मामलों में स्तन कैंसर की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि चिंता का विषय यह है कि स्तन कैंसर के करीब 30 प्रतिशत मामले 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में पाए जा रहे हैं, जो आमतौर पर अधिक आक्रामक होते हैं। पुरुषों में सिर और गले का कैंसर सबसे आम है, इसके बाद फेफड़ों और प्रोस्टेट कैंसर के मामले सामने आते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर अब पश्चिमी देशों की तुलना में करीब 10 वर्ष पहले दिखाई देने लगा है।
यथार्थ हॉस्पिटल सेक्टर-110 के कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. देवेश किशन ने कहा कि हाल के वर्षों में ओपीडी में आने वाले मरीजों की उम्र लगातार घट रही है। उन्होंने बताया कि अब 30 से 45 वर्ष के मरीजों में फेफड़ों का कैंसर, मुंह और गले का कैंसर, स्तन कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं। पहले जहां ज्यादातर मरीज 50 वर्ष से ऊपर के होते थे, वहीं अब युवाओं में भी यह बीमारी आम होती जा रही है।
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