बड़वानी , मार्च 22 -- मध्यप्रदेश के बड़वानी केंद्रीय जेल में महिला कैदियों द्वारा गठित 'मुक्ति' स्वयं सहायता समूह पुनर्वास और आत्मनिर्भरता का उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां गंभीर अपराधों में बंद महिलाएं अब अपने कौशल से नए जीवन की दिशा तलाश रही हैं।
जेल प्रशासन के अनुसार इस समूह का गठन जून 2025 में किया गया था, जिसका उद्देश्य महिला कैदियों को कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि रिहाई के बाद वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
जेल अधीक्षक शेफाली तिवारी ने बताया कि वर्तमान में जेल में करीब 1100 कैदी हैं, जिनमें 36 महिलाएं और उनके साथ छह बच्चे भी रह रहे हैं। महिलाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कार्यशालाएं, प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
'मुक्ति' समूह की शुरुआत 10 महिला कैदियों के साथ की गई थी, जिन्हें ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से अचार निर्माण, मिठाई, राखी, पारंपरिक आभूषण और अन्य उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। अब ये महिलाएं शादी-ब्याह के लिए सजावटी सामग्री और पैकेजिंग का काम भी कर रही हैं।
जेल प्रशासन ने बताया कि महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की मांग बढ़ रही है और इसके लिए बाहरी संस्थानों से भी समन्वय किया गया है। हाल ही में समूह की महिलाओं की कमाई की राशि उनके खातों में जमा की गई, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
अधिकारियों के अनुसार यह पहल न केवल महिलाओं के पुनर्वास में सहायक है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर हर व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
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