वाराणसी , फरवरी 1 -- सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने केंद्रीय बजट 2026 को शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान, महिला सशक्तिकरण और नवाचार को केंद्र में रखकर तैयार किया गया दूरदर्शी दस्तावेज बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट ज्ञान-आधारित एवं समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रो. शर्मा ने प्रत्येक जिले में 'गर्ल्स हॉस्टल' की स्थापना के प्रस्ताव को महिला शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि वीजीएफ मॉडल पर केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से बनने वाले ये छात्रावास ग्रामीण एवं दूर-दराज क्षेत्रों की छात्राओं को सुरक्षित और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण प्रदान करेंगे। इससे विशेषकर एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में छात्राओं की भागीदारी बढ़ेगी और उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता को मजबूती मिलेगी। यह पहल 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान को संस्थागत आधार देती है।
उन्होंने बजट में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना को भारतीय ज्ञान-परंपरा को वैश्विक स्तर पर सशक्त करने की दिशा में अहम कदम बताया। साथ ही तीन नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर) की स्थापना और सात मौजूदा संस्थानों के उन्नयन को फार्मा शिक्षा व अनुसंधान के लिए उपयोगी बताया। पशु चिकित्सा क्षेत्र में 20 हजार से अधिक प्रोफेशनल तैयार करने के लिए नए कॉलेजों और अस्पतालों हेतु ऋण सब्सिडी के प्रावधान को उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी बताया।
कुलपति ने एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र में 500 कॉलेजों और 15 हजार स्कूलों में 'कंटेंट क्रिएटर लैब्स' की स्थापना को युवाओं को डिजिटल और वैश्विक रोजगार के लिए तैयार करने वाली पहल बताया। उन्होंने कहा कि बजट से स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा को व्यय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में दीर्घकालिक निवेश के रूप में देख रही है, जो भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से अग्रसर करेगा।
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