सहारनपुर , जनवरी 29 -- पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन (वर्मा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने केंद्र सरकार से बजट सत्र में पृथक पश्चिम प्रदेश के निर्माण का प्रस्ताव पारित करने की मांग की है। ग्राम गंगदासपुर जट में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या और क्षेत्रफल की दृष्टि से अत्यधिक बड़ा राज्य है, जिसे सुचारु प्रशासन और संतुलित विकास के लिए चार भागों में विभाजित किया जाना चाहिए। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की तुलना में देश के छोटे राज्य जैसे हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, झारखंड, तेलंगाना और गोवा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रति व्यक्ति आय के मामले में कहीं आगे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि बड़े राज्यों की अपेक्षा छोटे राज्यों में बेहतर प्रशासन और तेज विकास संभव होता है। वर्मा ने आरोप लगाया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 जिले राज्य के कुल राजस्व का लगभग 80 प्रतिशत योगदान देते हैं, इसके बावजूद यह क्षेत्र शिक्षा और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं में पिछड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज तक न तो एम्स, न आईआईटी, न एनआईटी और न ही आईआईएम की स्थापना हुई है। साथ ही 45 वर्षों से मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की मांग की जा रही है, लेकिन इसे अब तक पूरा नहीं किया गया, जो यहां की लगभग आठ करोड़ आबादी के साथ अन्याय है। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी पूर्वांचल की राजनीति और दिल्ली के प्रभावशाली नेताओं पर डाली।

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