लखनऊ , फरवरी 1 -- राज्यसभा में उप नेता प्रतिपक्ष एवं सांसद प्रमोद तिवारी तथा उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधान मंडल दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि यह "झुनझुने" की तरह है, जो दिखता तो है लेकिन बजता नहीं।
उन्होंने इसे किसान, बेरोजगार युवाओं और लघु एवं मध्यम उद्योगों के खिलाफ बताते हुए कहा कि बजट से देश की जनता निराश हुई है। उनका दावा है कि बजट के बाद बाजार में गिरावट इसका संकेत है।
नेता ने कहा कि पिछले एक वर्ष से पूंजी निवेश ठहरा हुआ है और न तो विदेशी निवेश आ रहा है और न ही स्वदेशी निवेश में वृद्धि हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चालू वर्ष में राजस्व प्राप्तियों में 78,086 करोड़ रुपये और शुद्ध कर संग्रह में 1,62,748 करोड़ रुपये की कमी आर्थिक सुस्ती का संकेत है। उनके अनुसार स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, कृषि, ग्रामीण विकास, नगर विकास, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई योजनाओं में बजटीय कटौती की गई है, जिससे अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए कोई ठोस नई योजना या अतिरिक्त प्रावधान नहीं किया गया है और यह बजट केवल नारों तक सीमित है। दोनों नेताओं ने इसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अब तक के कार्यकाल का सबसे कमजोर बजट बताते हुए कहा कि इससे देश के समग्र विकास को बढ़ावा नहीं मिलेगा।
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