नयी दिल्ली , फरवरी 10 -- केंद्रीय बजट पर मंगलवार को दूसरे दिन की चर्चा में विपक्ष ने बजट को किसानों,गरीबों और अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए निराशा का बजट बताते हुए इसमें गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ उपेक्षा किये जाने का आरोप लगाया जबकि सत्तारूढ़ दल ने बजट को विकसित भारत की यात्रा को गति देने वाला बताया।
विपक्ष ने चर्चा के दौरान देश में, सरकारी कर्ज में वृद्धि, स्थायी और अच्छी नौकरियों के अवसर में कमी की शिकायत की और कहा कि बजट में विपक्षी दलों की सरकारों वाले राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
चर्चा के शुरू में कांग्रेस के प्रमोद तिवारी और कुछ अन्य सदस्यों ने व्यवस्था का प्रश्न उठाने की कोशिश की जिसे उप सभापति हरिवंश ने नामंजूर कर दिया।
बजट 20226-27 पर दूसरे दिन की सामान्य चर्चा शुरू करते हुए शिवसेना के मिलिंद देवड़ा ने कहा कि यह बजट ऐसे समय पेश किया गया है जबकि दुनिया द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के सबसे अस्थिर दौर से गुजर रही है। ऐसे कठिन राजनीतिक आर्थिक उठापटक के इस दौर में भारत ही विस्तृत आर्थिक वृद्धि और स्थिरता का टापू बना दिखता है।
उन्होंने कहा कि यह हमारे उद्योग क्षेत्र के लिए सरकार के कंधा से कंधा मिला कर काम करने का एक विरला अवसर है। सरकार में पूंजी निवेश के जरिए बड़े स्तर के काम करने की क्षमता है। पूरे उद्योग जगता को निजी क्षेत्र को 'गति, नवाचार और जोखिम उठाने का काम करना चाहिए ।'निजी निवेश न बढ़ने की श्री पी चिंदम्बरम की आलोचना का जवाब देते हुए श्री देवड़ा ने कहा कि 2024 में निजी निवेश का स्तर 6.5 लाख करोड़ रुपये के स्तर का था जो 2021 की तुलना में 66 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि श्री चिंदम्बरम जिस सरकार में थे उसने देश में विनिर्माण क्षेत्र को भुला दिया था जबकि इस सरकार के पिछले एक दशक में विनिर्माण क्षेत्र में बुनियादी परिवर्तन हुए है। इस सरकार ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना में 25000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया जिससे 12 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए है।
उन्होंने कहा कि श्री चिदंबरम जब वित्त मंत्री थे तो मनी लांड्रिंग रोधी प्रावधानों में ऐसे 'भयावह' प्रावधान कर दिये गये थे कि कारोबारियों के लिये देश में काम करना कठिन हो गया था।
केवाईसी न होने पर लोगों को परेशान किया जा सकता है। मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने जन विश्वास विश्वास अधिनियम के माध्यम से विभिन्न कानूनों में 1000 से अधिक में कारावास की सजा वाले प्रावधानों को हटा कर कारोबार की सुगमता को बढ़ाया गया है।
शिवसेना सदस्य ने भारत की अर्थव्यवस्था को 'निष्प्राण' बताने वालों की आलोचना करते हुए पांच आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था आज सबसे तेज वृद्धि दर वाली अर्थव्यवस्था है, यूपीआई के जरिए हर रोज 75 करोड़्र लेन-देन के साथ भारत दुनिया में डिजिटल भुगतान में अग्रणी है , जनधन योजना में 50 करोड़ लोगों के बैंक खाते खुले है और 41 लाख करोड़ रुपये लोगों के खाते में सीधे भेजने से तीन लाख करोड़ रूपये से अधिक की सरकारी बचत हुई है, जीएसटी संग्रह चार साल में 11 लाख करोड़ रुपये से 2025 में 22 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यूरोपीय संघ चीन या अमेरिका की बजाय भारत से मुक्त व्यापार समझौता कर रहा है तो ऐसी अर्थव्यवस्था को निष्प्राण कैसे कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि विश्व के सभी महाद्विपों के देश भारत के साथ व्यापार और व्यापार समझौते करना चाहते हैं। ये समझौते हमारी शर्तों पर किये जा रहे हैं।
श्री देवड़ा ने कहा, 'अगर कुछ मरा है तो वह है भारत में , भारत की अर्थव्यवस्था में और भारत के लोगों में कुछ लोगों का विश्वास... ऐसे लोगों में जिंदा है तो भारत के प्रति उनकी नफरत।"द्रमुक की डॉ कणिमोझी एनवीएन ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि 'यह व्यर्थ' का बजट है और इसमें किसानों, गरीबों और अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए कुछ नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस बजट में सरकार ने तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के हितों की उपेक्षा की है जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के प्रति विशेष लगाव दिखाया गया है।
द्रमुक सदस्य ने यह भी कहा कि बजट राजकोषीय अनुशासन पर भी खरा नहीं उतरता क्योंकि कर्ज का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने पर खर्च किया जा रहा है और विकास लिए पर्याप्त धन नहीं बचता है।
भाजपा के सुरेंद्र सिंह नागर ने बजट को देश की विकास यात्रा को मार्गदर्शन देने वाला और राष्ट्रनिर्माण का एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश के आंकड़ों में विश्वास नहीं है जबकि विश्व बैंक के अध्यक्ष ने पिछले दस साल में भारत में अवसंरचाना विकास की स्थिति को सराहनीय बताया है। एलन मस्क ने कहा है कि भारत का विश्व जीडीपी की वृद्धि में योगदान चीन के बाद सबसे ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि 2014 में भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में 10वें स्थान पर थी और आज यह चौथे नंबर की बड़ी अर्थव्यवस्था बन गयी है। अवसंरचना विकास तथा कृषि क्षेत्र के बजट में अभूतपूर्व दर से वृद्धि हुई है ।
संप्रग सरकार के समय संसद के हर सत्र में महंगाई पर चर्चा मजबूरी बन गयी थी लेकिन आज महंगाई न्यूनतम स्तर पर है।
कांग्रेस पार्टी के नीरज डांगी ने बजट की आलोचना करते हुए कहा , 'इसमें आंकड़ों की चमक जरूर है पर आम आदमी की जिंदगी को रोशन करने वाली इसमें कोई बात नहीं दिखती है।' उन्होंने बजट के दिन बांबे शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स में 2300 अंक की गिरावट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह " यह बजट न तो निवेशकों की उम्मीदों पर खरा उतरा है , न ही बाजार और आम आदमी की उम्मीदों पर।"उन्होंने कहा कि सरकारी पूंजीगत खर्च बढ़ाने से अच्छे रोजगार के अवसर नहीं बढ़े हैं। लोग अस्थायी नौकरियां करने के मजबूर है जिनमें कोई स्थायित्व नहीं दिखता।
श्री डांगी ने कहा कि बजट में राजस्थान के लिए भी कुछ खास नहीं मिला है जबकि वहां करीब 3200 प्रथमिक विद्यालय भवन न होने के कारण मंदिरों से चलाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय पूल के संसाधनों में राजस्थान का हिस्सा 6.03 प्रतिशत से गिर कर 5.9 प्रतिशति रह गया है।
तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह बजट चार्वाक दर्शन के - 'यदा जीवेत सुखं जीवेत, ऋणम कृत्वा घृतम पीवेत' वाली सोच का बजट है। सरकार कर्ज लेकर खर्च कर रही है, आम लोगों को काई राहत नहीं है और देश में विषमता बढ़ रही है।
उन्होंने कुछ क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को 20247 तक 'कर छूट' दिये जाने के प्रस्तावों की भी आलोचना की और कहा कि इस बार व्यक्तिगत आयकरदाताओं को को काई रियायत नहीं दी गयी।
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