जयपुर , अप्रैल 08 -- राजस्थान के सलूम्बर जिले में अज्ञात बीमारी से बच्चों की मौत के प्रकरण में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग निरंतर निगरानी एवं पूरे उदयपुर संभाग में घर घर सर्वे कर रहा है जिसमें प्रभावित क्षेत्र में एक लक्षणयुक्त रोगी पाया गया। अब तक सात लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि सर्वे में किसी भी प्रकार का रेफर केस सामने नहीं आया हैं।
श्रीमती राठौड़ ने बताया कि बुधवार को भी सलूम्बर सहित उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा एवं प्रतापगढ़ में मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए सघन गतिविधियां की गईं। संभाग स्तर पर 6167 टीमों द्वारा एक लाख 20 हजार 961 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 1470 लक्षणयुक्त रोगी पाए गए। इनमें से 924 रोगियों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया तथा 85 रोगियों को रेफर किया गया।
इसी प्रकार मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए 5532 स्थानों पर एंटी-लार्वल कार्यवाही की गई। साथ ही 950 ब्लड स्लाइड कलेक्शन एवं 125 ब्लड सैंपल लिए गए।
उन्होंने बताया कि सलूम्बर के लसाडिया के प्रभावित क्षेत्र में घर-घर सर्वे एवं नियंत्रण गतिविधियाँ संचालित की गईं। प्रभावित क्षेत्र में 12 टीमों द्वारा 379 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें एक लक्षणयुक्त रोगी पाया गया, जिसका मौके पर ही उपचार किया गया। किसी भी प्रकार का रेफर केस सामने नहीं आया। मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए 136 स्थानों पर एंटी-लार्वल गतिविधियाँ की गईं। साथ ही 01 ब्लड स्लाइड कलेक्शन एवं 02 ब्लड सैंपल लिए गए। इस क्षेत्र में आज कोई मृत्यु दर्ज नहीं हुई है।
श्रीमती राठौड़ ने बताया कि सलूम्बर जिले के अन्य ब्लॉकों में भी व्यापक स्तर पर सर्वे कार्य किया गया। कुल 370 टीमों द्वारा 6264 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें बुखार, उल्टी, जुकाम आदि लक्षणों वाले 213 रोगी चिन्हित हुए। इनमें से 213 रोगियों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया तथा 06 रोगियों को रेफर किया गया। मच्छर नियंत्रण के तहत 476 स्थानों पर एंटी-लार्वल गतिविधियाँ की गईं। 474 ब्लड स्लाइड कलेक्शन एवं 19 ब्लड सैंपल लिए गए। जिले के चिकित्सा संस्थानों में कुल ओपीडी संख्या 1590 दर्ज की गई।
निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि बुधवार को संभाग में किसी भी प्रकार की मृत्यु दर्ज नहीं हुई है। अब तक सात मृत्यु रिपोर्ट हुई हैं, जिनमें से पांच मृत्यु घर या रास्ते में, एक मृत्यु परिजनों द्वारा स्वैच्छिक डिस्चार्ज के पश्चात एवं एक मृत्यु आरएनटी मेडिकल कॉलेज में हुई है।
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