कांकेर, मार्च 04 -- छत्तीसगढ़ में बस्तर के घने जंगलों में कभी गोलियों की तड़तड़ाहट और बारूद की महक के बीच गुजर-बसर करने वाले पूर्व नक्सलियों के लिए यह होली किसी नए जीवन का आगाज लेकर आई है। हिंसा और खून-खराबे का रास्ता छोड़ शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं ने समाज की मुख्यधारा में लौटने के बाद अपनी पहली होली कांकेर जिले के भानुप्रतापुर स्थित ग्राम मुल्ला चौगेल पुनर्वास केंद्र में धूमधाम से मनाई।
पुनर्वास केंद्र के अधीक्षक से आज मिली जानकारी के अनुसार,कभी जिन हाथों में एके-47, सेल्फ लोडिंग राइफल (एसएलआर) और आईईडी जैसे घातक हथियार हुआ करते थे, उन्हीं हाथों में इस बार गुलाल, अबीर और पिचकारी नजर आई। पुनर्वास केंद्र परिसर में रंगों की होली, ढोल की थाप और गीतों के बीच पूर्व नक्सलियों ने न सिर्फ खुलकर होली खेली, बल्कि एक-दूसरे को गले लगाकर नई शुरुआत और आपसी भाईचारे का संदेश भी दिया।
वर्षों बाद वे बिना किसी भय, दबाव या सशस्त्र संगठन की बेड़ियों के खुले माहौल में त्योहार मना सके। केंद्र में रह रहे पूर्व नक्सली ने बताया कि पहले होली का मतलब सिर्फ एक और दिन होता था, जो पेड़ों के नीचे या गुफाओं में छिपकर गुजारना होता था। आज वास्तविक रूप से रंगों में सराबोर होकर और लोगों से मिलकर लग रहा है कि असल जिंदगी यहीं है।
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