कोलकाता , फरवरी 12 -- चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में आगामी 18वें विधानसभा चुनावों से पहले 78 बड़े आवासीय परिसरों में मतदान केन्द्र स्थापित करने का निर्णय लिया है।
आयोग ने बताया कि इन परिसरों की पूरी सूची 25 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। यह निर्णय राज्य में मतदाता सूची में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बीच लिया गया है।
आयोग अनुसार, पुनरीक्षण अभ्यास के बाद कुल मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है, जिसके कारण मतदान केंद्रों की संख्या में भी कमी आ सकती है। एक आयोग अधिकारी ने कहा, "हमने 78 बड़े आवासीय परिसरों की पहचान की है। विस्तृत सूची 25 फरवरी को जारी की जाएगी। यदि पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या घटती है, तो मतदान केंद्रों की संख्या स्वाभाविक रूप से कम होगी।"चुनाव आयोग ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य मतदाता मतदान प्रतिशत बढ़ाना है, विशेष रूप से बड़े आवासीय परिसरों में रहने वाले लोगों के बीच, जो अक्सर मतदान केंद्र दूर होने के कारण वोट डालने नहीं जाते। अधिकारियों ने बताया कि यह समस्या वरिष्ठ नागरिकों के समक्ष भी आती है।
एक अधिकारी ने कहा, "अनुभव बताता है कि जब मतदान केंद्र दूर होते हैं, तो कई मतदाता मतदान के लिए नहीं पहुंचते। बड़े हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के भीतर मतदान केंद्र होने से मतदान आसान और सुविधाजनक होगा।"इससे पूर्व, आयोग ने कोलकाता सहित सात जिलों के 69 हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में मतदान केंद्र स्थापित करने की योजना की घोषणा की थी। विस्तृत सर्वेक्षण के बाद यह संख्या बढ़ाकर 78 कर दी गयी है। जिला-वार विवरण अंतिम सूची जारी होने के बाद सामने आएगा।
इस निर्णय पर राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। आयोग ने बाद में स्पष्ट किया कि ऐसे मतदान केंद्र केवल उन्हीं आवासीय परिसरों में बनाए जाएंगे, जहां 300 से अधिक पंजीकृत मतदाता हों।
बताया गया है कि सुश्री बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में कई बड़े आवासीय परिसर हैं, जहां मतदाताओं की संख्या इस सीमा से अधिक है। भाजपा नेतृत्व ने इसे स्वागतयोग्य बताया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित