रायदिघी/संदेशखाली , अप्रैल 17 -- पश्चिम बंगाल में सुंदरबन के ग्रामीण रास्तों पर एक ओर लहलहाते खेत और दूसरी ओर सुंदरी तथा ताड़ के पेड़ों के बीच से गुजरती नदी के किनारे रिक्शा-वैन पर लगे लाउडस्पीकरों से चुनावी प्रचार की गूँज सुनाई दे रही है। राज्य में चुनाव प्रचार प्रचार अब जोरों पर है।

रंग-बिरंगे परिधानों में पैरों और हथेलियों पर 'आलता' लगाए महिलाएं और कांवड़ (बांक) लिए युवा मंदिर बाजार स्थित शिव मंदिर की ओर नंगे पैर बढ़ रहे हैं। यह 'नील षष्ठी' का दिन है। यह धार्मिक पर्व इस बार उन चुनावी रैलियों के बीच पड़ा है जो पश्चिम बंगाल के भविष्य का फैसला करेगा।

स्थानीय व्यापारी गणेश नस्कर कहते हैं कि सुंदरबन एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ पहले वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि, इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय सव्यंसेवक संघ (आरएसएस) की स्पष्ट मौजूदगी से मुकाबला काफी करीबी है। सड़कों के किनारे भगवा झंडे, तृणमूल के चुनाव चिन्ह और वामपंथ के लाल झंडे हर तरफ दिखाई दे रहे हैं।

विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन सुंदरबन सघन आबादी वाला क्षेत्र है, जहाँ प्रति वर्ग किलोमीटर लगभग एक हजार लोग रहते हैं। यहाँ की जनसंख्या में एक तिहाई अनुसूचित जाति, एक तिहाई मुस्लिम और शेष उच्च जाति के हिंदू हैं, जिनके बीच आदिवासी और ईसाई आबादी भी बसी हुई है।

कोलकाता से लगभग 70 किलोमीटर दूर मंदिर बाजार में वाम मोर्चा की रैली आयोजित की जा रही है, जहाँ मुख्य आकर्षण नौशाद सिद्दीकी हैं। पीर फुरफुरा शरीफ के पोते सिद्दीकी को 'भाईजान' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए वाम गठबंधन के साथ अपनी पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) का चुनावी समझौता किया है।

रैली में हजारों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों को संबोधित करते हुए श्री सिद्दीकी ने कहा कि वे उन लोगों के लिए काम करेंगे जिनके नाम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई भले ही भाजपा और तृणमूल से है, लेकिन वे उन कार्यकर्ताओं की भी मदद करेंगे जिनका नाम सूची से बाहर रह गया है।

दक्षिण 24 परगना के लगभग 2.2 लाख लोगों के नाम अंतिम सूची में काट दिए गए हैं। इनमें से कई मौसमी मजदूर हैं जो आजीविका के लिए पलायन करते हैं। सुंदरबन में समुद्र लगातार जमीन और खेतों को निगल रहा है, जिससे खेती की जमीन कम होती जा रही है।

पिछले विधानसभा चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने वाला वाम मोर्चा इस बार अपनी स्थिति सुधारने की उम्मीद कर रहा है। इस क्षेत्र में तृममूल और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन यदि वाम दल अपनी वोट हिस्सेदारी बढ़ाते हैं, तो समीकरण बदल सकते हैं।

जंगल-महल के इस क्षेत्र में वाम मोर्चा की वापसी का जिम्मा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) मंत्री कांति गांगुली के कंधों पर है। वे अम्फान चक्रवात के दौरान किए गए राहत कार्यों के लिए पूरे सुंदरबन में सम्मानित हैं। 80 वर्षीय नेता कांति गांगुली खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन वे अपने बेटे सम्मो गांगुली सहित अन्य उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं।

कांति गांगुली ने कहा कि यह एक अत्यधिक ध्रुवीकृत चुनाव है, लेकिन उन्हें अपने पुराने आधार को वापस पाने की उम्मीद है। वहीं, सम्मो गांगुली ने बताया कि प्रत्येक चक्रवात जमीन को खा रहा है और खारा पानी खेतों को बेकार कर रहा है। उन्होंने तूफान रोधी दीवारें बनाने और 'लवणता-रोधी' चावल की किस्मों को पेश करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि 10 लाख से अधिक लोग आजीविका के लिए आंध्र प्रदेश और दिल्ली जैसे दूर-दराज के इलाकों में काम कर रहे हैं। काकद्वीप की पूर्णिमा मोंडल जैसी कुछ महिलाएं भाग्यशाली रहीं जो गुरुग्राम से समय पर लौटकर अपना नाम मतदाता सूची में दोबारा जुड़वा सकीं।

अवसरों की कमी के कारण लोग तस्करों और भू-माफियाओं का शिकार भी हो रहे हैं। रायदिघी के उत्तर में स्थित संदेशखाली के द्वीपों में अब तृणमूल और भाजपा के बैनर लहरा रहे हैं। यहाँ मुख्य भूमि से नावों के जरिए मोटरसाइकिल, अनाज और मोबाइल फोन जैसे सामान ले जाए जा रहे हैं।

इन द्वीपों में कुछ साल पहले आम किसानों ने उन बाहुबलियों के खिलाफ विद्रोह किया था जिन्होंने दशकों तक अपना दबदबा बनाए रखा था। स्थानीय दुकानदार नेमाई जेना ने बताया कि शाहजहाँ शेख और उसके साथियों ने पहले वामपंथ और फिर तृणमूल के शासन में मछली व्यापार के जरिए अपना रसूख बढ़ाया और सत्ता के अहंकार में जमीनों पर कब्जा किया।

वर्ष 2024 के संसदीय चुनावों से पहले यह गुस्सा फूट पड़ा और लोगों ने मीडिया के सामने माफिया जैसे इस नियंत्रण के खिलाफ बात की। पुलिस ने देरी से ही सही, लेकिन कार्रवाई शुरू की। भाजपा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और शाहजहाँ की हिंसा की शिकार रहीं गृहिणी रेखा पात्रा को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया है।

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