कोलकाता , दिसंबर 02 -- चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के उन 2,208 मतदान केंद्रों को विशेष निगरानी में रखा है जहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) फॉर्म का 100 प्रतिशत वितरण, संग्रहण और डिजिटलीकरण हुआ, लेकिन एक भी फॉर्म 'असंग्रहणीय'नहीं बताया गया।
चुनाव आयोग ने संबंधित ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) से हस्ताक्षरित रिपोर्ट मांगी है, जिसे डीईओ (जिला निर्वाचन अधिकारी) द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित करना होगा। यह रिपोर्ट मंगलवार सुबह 10 बजे तक जमा करनी है। यह अलर्ट सोमवार को तब सामने आया जब नामांकन फॉर्मों के डिजिटलीकरण का काम अंतिम चरण में था।
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने 7,844 मतदान केंद्रों की पहचान की जहां डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है और असंग्रहणीय फॉर्म शून्य से 10 के बीच हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सबसे हैरान करने वाली स्थिति उन 2,208 बूथों की है जहां असंग्रहणीय फॉर्म शून्य हैं। इसका मतलब है कि इन बूथों में हर मतदाता का हिसाब है-न कोई मृत्यु, न कोई डुप्लिकेट, न कोई स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता और न ही कोई पता न लगने वाला व्यक्ति।
उन्होंने कहा "इतनी बड़ी संख्या में बूथों का पूरी तरह से त्रुटिरहित डेटा देना अत्यंत असामान्य है। सौ प्रतिशत डिजिटलीकरण के बाद भी इन 2,208 बूथों पर एक भी असंग्रहणीय फॉर्म नहीं दिखा। ईसी ने मंगलवार सुबह तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।" उन्होंने बताया कि शेष 5,636 बूथों पर असंग्रहणीय फॉर्म 1 से 10 के बीच हैं। इनके लिए डीईओ को पूरी एसआईआर प्रक्रिया की दोबारा जांच करने और रिपोर्ट राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को भेजने के बाद निर्वाचन सदन को प्रेषित करने को कहा गया है। ये बूथ ईसी के बैकएंड मॉनिटरिंग सिस्टम से रियल-टाइम डेटा अपलोड के दौरान चिह्नित हुए।
आंकड़ों के अनुसार, 542 बूथों पर केवल एक, 420 पर दो, 372 पर तीन, 374 पर चार और 481 पर पांच असंग्रहणीय फॉर्म हैं। 4 नवंबर से शुरू हुई एसआईआर में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद ये गड़बड़ियां आई हैं। कई जिलों में डिजिटलीकरण पूरा होने के करीब पहुंचने पर सीईओ कार्यालय को "चौंकाने वाले पैटर्न" दिखे, खासकर उन बूथों में जहां पूरे एक साल में एक भी मृत्यु, पता परिवर्तन या डुप्लिकेट प्रविष्टि दर्ज नहीं हुई।
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