(जयंत रॉय चौधरी से )नयी दिल्ली , जनवरी 23 -- बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देशवासियों का आह्वान किया है कि वे एकजुट होकर माेहम्मद युनुस के नेतृत्व वाली "कठपुतली सरकार" को उखाड़ फेंकें।

शेख हसीना ने शुक्रवार को यहाँ एक संवाददाता सम्मेलन को ऑडियो-लिंक के ज़रिए संबोधित करते हुए बंगलादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर देश को अराजकता में धकेलने और "लोकतंत्र को गंभीर खतरे में डालने" का आरोप लगाया।

भारतीय और विदेशी मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली इस कठपुतली सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए पूरे देश को एकजुट होकर उठ खड़ा होना चाहिए। 1971 की भावना का समर्थन करने वाली सभी ताकतों को यूनुस सरकार के धोखेबाज़ इरादों का सामना करना चाहिए।"उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में संवाददाताओं के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। यह कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब अंतरिम सरकार भारत में शेख हसीना को लोगों को संबोधित करने की इजाज़त देने का विरोध कर रही है। कुछ दिनों पहले बंगलादेश में ब्रिटिश उच्चायुक्त सारा कुक ने भारत का दौरा किया था और थिंक टैंक तथा सेवानिवृत लेकिन असरदार भारतीय राजनयिकों से मुलाकात की थी। ऐसा शायद बंगलादेश में अगले महीने होने वाले विवादित चुनावों पर भारत की सोच को बदलने के लिए किया गया था।

पिछले वर्ष 5 अगस्त, 2024 को ढाका में जानलेवा भीड़ से बचकर बंगलादेश के सैन्य विमान से भारत में सुरक्षित पहुंचने के बाद शेख हसीना की यह पहली मीडिया कॉन्फ्रेंस हैं। पिछले 16 महीनों से वह भारत में कहीं एक सुरक्षित स्थान पर निर्वासन में रह रही हैं। हालांकि हसीना ने पहले कुछ ईमेल इंटरव्यू दिए हैं, लेकिन सत्ता से हटाए जाने के बाद से वह कभी प्रेस के सामने नहीं आयी हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ने बंगलादेश में रोज़ाना की हिंसा और अराजकता को खत्म करने, अल्पसंख्यकाें और महिलाओं की सुरक्षा पक्की करने और प्रेस तथा विपक्ष के खिलाफ़ राजनीति से प्रेरित कामों को रोकने की भी मांग की। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को फिर से स्थापित करने और पिछले एक साल में हुई हिंसा और मौतों की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र से जांच की मांग की है।

शेख हसीना ने यह भी आरोप लगाया कि बंगलादेश एक "धोखेबाज़ साज़िश" का सामना कर रहा है जिसका मकसद देश के कुछ इलाके सौंपने का है और देश की संप्रभुता और एकता खतरे में है। यूनुस सरकार ने कथित तौर पर म्यांमार के विद्रोही गुटोंं को आपूर्ति के लिए अराकान कॉरिडोर बनाने का विचार किया है। यह सरकार चीन के साथ कई परियोजनाओं पर भी बातचीत कर रही है, जिससे उत्तरी पड़ोसी देश के पास खास हवाई अड्डे और बंदरगाहों का नियंत्रण जा सकता है, इसके अलावा चटगांव बंदरगाह को विदेशी कंपनियों को लीज विकल्प देने पर भी विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "बंगलादेश आज एक ऐसा देश है जो खून से लथपथ है," । उन्होंने मौजूदा हालात को डर, दबाव और आर्थिक तंगी वाला करार दिया और 1971 की धर्मनिरपेक्ष भावना का समर्थन करने वाली सभी ताकतों से "यूनुस शासन के धोखेबाज़ इरादों का सामना करने" को कहा।

अवामी लीग प्रमुख ने कहा " 5 अगस्त, 2024 को मुझे पद से हटाए जाने के बाद से देश में अराजकता फैल गई है। आतंकवादियों और मुहम्मद यूनुस ने मुझे ज़बरदस्ती हटा दिया। उस दिन से, देश अराजकता में डूब गया है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से कमज़ोर किया गया है।"उन्होंने वर्तमान बंगलादेश को "एक बड़ी जेल" बताया, जहाँ आम लोग रोज़ाना की हिंसा, असुरक्षा और आर्थिक मुश्किलों के बीच ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

बंगलादेश के पूर्व शिक्षा मंत्री महिबुल हसन चौधरी नौफेल ने पत्रकारों के इस सवाल "कि अवामी लीग मौजूदा अंतरिम सरकार को हटाने की क्या योजना बना रही है" के जवाब में कहा ,हम गृह युद्व जैसे हालात बनाने के लिए सेना से नहीं लड़ना चाहते हैं और हमारी लड़ाई लोकतांत्रिक तरीकों और विरोध प्रदर्शनों के ज़रिए होगी।"शेख हसीना कैबिनेट में पूर्व सूचना मंत्री मोहम्मद अराफात ने कहा, "हमने लोगों से 'नो बोट (अवामी पार्टी का चुनाव चिन्ह), नो वोट' के नारे के साथ चुनावों का बहिष्कार करने को कहा है।"शेख हसीना के संबोधन से पहले बंगलादेश के पूर्व विदेश मंत्री और अवामी लीग के नेता, ए के अब्दुल मोमेन ने कहा कि समय की ज़रूरत है कि मुहम्मद यूनुस की सरकार को बदला जाए और चुनाव कराने के लिए एक तटस्थ सरकार बनायी जाये।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 12 फरवरी को होने वाले चुनाव एक "दिखावा" हैं क्योंकि इनमें अवामी लीग समेत बड़ी राजनीतिक पार्टियों को हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं दी जा रही हैं। इस तरह की कोशिश से न तो लोकतंत्र की स्थापना होगी और न ही देश में राजनीतिक या आर्थिक स्थिरता आएगी।

पूर्व विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि बंगलादेश तेज़ी से अतिवाद और आतंकवाद की ओर बढ़ रहा है और मौजूदा राजनीतिक माहौल कट्टरवाद और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने अंतरिम सरकार पर जानबूझकर समाज के तीन हिस्सों अवामी लीग के सदस्यों और समर्थकों और धार्मिक अल्पसंख्यक, खासकर हिंदू समुदाय को प्रताड़ित करने आरोप लगाया।

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