अबिदजान , मार्च 14 -- फ्रांस ने औपनिवेशिक काल के दौरान लूटी गयी एक अमूल्य विरासत, 'जिजी अयोक्वे' नाम वाले एक पवित्र 'ढोल' को आधिकारिक तौर पर उसके मूल देश आइवरी कोस्ट को लौटा दिया है।
परंपरा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रहे इस ढोल को शुक्रवार सुबह एक विशेष विमान के जरिए अबिदजान के हवाई अड्डे पर पहुंचाया गया, जहां आदिवासी कबीलों के पारंपरिक प्रमुखों और सांस्कृतिक अधिकारियों ने भावुक होकर इसका नाच गाकर स्वागत किया। इस अवसर पर स्थानीय लोगों के चेहरे पर खुशी की चमक और आंखों में नमी सहज ही देखी जा सकती थी।
दरअसल लगभग 3.3 मीटर लंबा और 430 किलोग्राम वजनी यह विशाल ढोल आइवरी कोस्ट के 'अचान' समुदाय की पहचान का प्रतीक है। इसे 1916 में फ्रांसीसी औपनिवेशिक सेना ने जब्त कर लिया था। उस समय, ग्रामीण इसका इस्तेमाल संदेश भेजने, खतरे की चेतावनी देने और औपनिवेशिक जबरन श्रम के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए करते थे। पेरिस के क्वाई ब्रानली संग्रहालय में दशकों तक रहने के बाद, फ्रांसीसी संसद के पारित एक विशेष कानून के तहत इसकी वापसी संभव हुई है।
आइवरी कोस्ट की संस्कृति मंत्री फ्रांस्वा रिमार्क ने इसे 'न्याय और स्मृति का क्षण' बताया। इस ढोल को वर्तमान में जलवायु-नियंत्रित वातावरण में रखा गया है ताकि वह यहां के मौसम के अनुकूल हो सके। इसे अप्रैल में अबिदजान के 'अजायबघर' में स्थायी रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। यह वापसी अफ्रीका के उन 148 कलाकृतियों की सूची में पहली है, जिन्हें आइवरी कोस्ट ने फ्रांस से वापस मांगा है।
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