जयंत राय चौधरी सेशिलांग , मार्च 16 -- ब्रिटिश काल में बसे इस पहाड़ी शहर शिलांग में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में नीति-निर्माताओं, राजनयिकों और बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों ने सड़कों, नदियों और बंदरगाहों से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा की। बैठक का आयोजन थिंक-टैंक एशियन कॉन्फ्लुएंस ने भारत के विदेश मंत्रालय, जापान सरकार और क्षेत्रीय संगठन बिम्सटेक के सहयोग से किया।
पूर्वोत्तर भारत जल्द ही बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा दिखाई दे रहा है। क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही कई क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाएं इसके आर्थिक परिदृश्य और एशिया में इसकी रणनीतिक भूमिका को नया आकार दे सकती हैं।
बैठक में कई प्रमुख परियोजनाएं चर्चा के केंद्र में रहीं। इनमें भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग, कलादान बहु-माध्यम पारगमन परिवहन परियोजना और बांग्लादेश के मातरबारी गहरा समुद्री बंदरगाह का निर्माण शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने पर पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया और वैश्विक बाजारों से सीधे जोड़ने वाले नए व्यापार मार्ग बन सकते हैं।
जापान के विदेश मामलों के राज्य मंत्री इवाओ होरी ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक महत्वपूर्ण 'गेटवे' बन सकता है। उनके अनुसार नेपाल, भूटान, भारत, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला यह क्षेत्र भविष्य में एक बड़े आर्थिक इंजन के रूप में उभर सकता है।
इसी रणनीति के तहत जापान 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' पहल के अंतर्गत बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाली औद्योगिक वैल्यू चेन विकसित करना चाहता है। इस नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा टाटा ग्रुप की असम में बन रही लगभग 27,000 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग यूनिट है, जहां ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल डिवाइस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए चिप्स तैयार किए जाएंगे।
बांग्लादेश के मातरबारी में बन रहा गहरे समुद्र का बंदरगाह, जिसे जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के सहयोग से विकसित किया जा रहा है वह सालाना 1.6 से 3.8 करोड़ टन कार्गो संभालने में सक्षम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बंदरगाह क्षेत्र के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच का एक नया समुद्री द्वार बन सकता है।
ये पहलकदमियां बीबीआईएन पहल (बांग्लादेश-भूटान-भारत-नेपाल) और वे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ हब्स जैसे क्षेत्रीय ढांचों के साथ भी जुड़ी हुई हैं, जिनका उद्देश्य सीमा-पार आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना और निर्यात को बढ़ावा देना है।
नेपाल-भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष केसी सुनील ने कहा कि नेपाल बांग्लादेश को जलविद्युत बेचने और उसके बंदरगाहों के माध्यम से अपने उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की योजना बना रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में 1,360 किलोमीटर लंबा भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग शामिल है, जो भारत के सीमावर्ती शहर मोरेह को म्यांमार के रास्ते थाईलैंड के मे सोट से जोड़ेगा। आगे चलकर यह मार्ग सिंगापुर से लेकर वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी तक फैले व्यापक एशियाई सड़क नेटवर्क से जुड़ सकता है।
बांग्लादेश के भारत में उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह कहा कि बांग्लादेश भी इन उभरते परिवहन गलियारों से जुड़ना चाहता है, जिससे क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती मिलेगी।
एक अन्य अहम योजना कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य म्यांमार के जरिए पूर्वोत्तर भारत को समुद्री मार्ग उपलब्ध कराना है। हालांकि म्यांमार में जारी राजनीतिक अस्थिरता के कारण परियोजना के पूर्ण संचालन में देरी हो रही है।
मिजोरम इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के सदस्य सचिव रो चामलियाना ने कहा, "म्यांमार से लगी मिजोरम सीमा तक कनेक्टिविटी से जुड़ा हमारा हिस्सा पूरी तरह तैयार है।"हालांकि परियोजना से संबंधित अधिकांश बुनियादी ढांचा तैयार हो चुका है और म्यांमार के सितवे बंदरगाह तक परीक्षण के तौर पर माल भेजा भी जा चुका है, लेकिन म्यांमार में जारी गृह संघर्ष के कारण इस परियोजना के पूर्ण रूप से संचालन में देरी हो रही है।
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि सीमा-पार परियोजनाओं की प्रगति अक्सर साझेदार देशों की राजनीतिक परिस्थितियों और लॉजिस्टिक स्थितियों पर निर्भर करती है, जिससे कई बार समयसीमा प्रभावित हो जाती है।
भारत के विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव (पूर्व) रिवा गांगुली दास के अनुसार, सीमा-पार परियोजनाओं की समयसीमा अक्सर साझेदार देशों की राजनीतिक और लॉजिस्टिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है। फिर भी इनके पूरा होने पर ये क्षेत्र के लिए "गेम-चेंजर" साबित हो सकती हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ये नए परिवहन मार्ग पूर्वोत्तर भारत की सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) पर निर्भरता भी कम कर सकते हैं, जो फिलहाल इस क्षेत्र को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला मुख्य स्थल मार्ग है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित