हैदराबाद , जनवरी 23 -- तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस समिति (टीपीसीसी) के अध्यक्ष और एमएलसी महेश कुमार गौड़ ने शुक्रवार को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर ) के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने फोन टैपिंग मामले में खुद को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाए जाने की बात कही थी।

श्री गौड़ ने इस दावे को "हास्यास्पद" करार देते हुए कहा कि जांच पूरी तरह संविधान के दायरे में की जा रही है। उन्हाेंने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि यदि कांग्रेस सरकार की कोई राजनीतिक दुर्भावना होती तो सत्ता में आने के तुरंत बाद ही कार्रवाई कर दी जाती। उन्होंने कहा, "केटीआर को फोन टैपिंग मुद्दे पर आत्ममंथन करना चाहिए। दो व्यक्तियों के बीच बातचीत सुनना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का घोर उल्लंघन है।"श्री रामाराव की टिप्पणियों पर कटाक्ष करते हुए टीपीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि उनके बयान "शैतान द्वारा वेदों का हवाला देने" जैसे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, " आप किसी के कपड़ों में आग लगाकर फिर भाग नहीं सकते।" श्री गौड़ ने आरोप लगाया कि केसीआर परिवार ने "अली बाबा और चालीस चोरों" की तरह लूट मचाई और बीआरएस को "चोरों का गिरोह" बताया। उन्होंने नगर निकाय चुनावों के दौरान केटीआर की बयानबाजी का भी मजाक उड़ाया। फोन टैपिंग मामले को गंभीर बताते हुए श्री गौड़ ने कहा कि इसकी तुलना आंदोलन से जुड़े मामलों से करना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की जांच में अधिकारियों की भी कुछ सीमाएं होती हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीआरएस एमएलसी और श्री रामाराव की बहन के. कविता ने स्वयं शिकायत की थी कि उनका फोन टैप किया गया, तब श्री रामाराव की ओर से कोई स्पष्टीकरण क्यों नहीं आया।

केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री गौड़ ने सवाल किया कि भाजपा कलेश्वरम परियोजना से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों पर चुप क्यों है और भाजपा नेताओं से जुड़े ईडी मामलों में देरी क्यों हो रही है।उन्होंने कहा कि फोन टैपिंग केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली ताकतों के खिलाफ ही की जानी चाहिए। श्री गौड़ ने आरोप लगाया कि अतीत में उन्हें भी नक्सलियों से संबंध होने का बहाना बनाकर निगरानी में रखा गया था।

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