भुवनेश्वर , अप्रैल 19 -- अपनी तरह के पहले प्रयास में भुवनेश्वर में आयोजित 61वें फेमिना मिस इंडिया में ''विश्व सूत्र - दुनिया के लिए भारत की बुनाई'' नामक एक डिजाइनर संग्रह प्रस्तुत किया गया है, जो भारतीय हथकरघा को समकालीन वैश्विक डिजाइन के नये संदर्भों में स्थापित करता है।

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय और राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी) ने इस पहल में 30 विशिष्ट हथकरघा बुनाई शैलियों को एक साथ एक जगह प्रदर्शित करवाया है। इनमें से प्रत्येक अलग- अलग राज्य व क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं।

इन देसी कलाओं को 30 देशों से प्राप्त प्रेरणाओं के माध्यम से इनकी नयी व्याख्या की गई है। ये प्रस्तुतियां विविध सांस्कृतिक तत्वों, आकृतियों और डिजाइन संवेदनाओं को प्रदर्शित करती हैं।

कपड़ा मंत्रालय ने रविवार को एक विज्ञप में कहा कि विश्व सूत्र भारतीय हथकरघा को वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक और डिजाइन के मामले में अग्रणी बनाने का एक रणनीतिक प्रयास है, साथ ही इसकी प्रामाणिकता को भी बरकरार रखता है। यह भारत की हथकरघा परंपराओं की गहराई और निरंतरता को भी दर्शाता है-पीढ़ियों से संरक्षित और परिष्कृत तकनीकें, जो देश की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं।

वैश्विक फैशन के नजरिए से तैयार किए गए इस संग्रह में भारतीय बुनाई को विशिष्ट सांस्कृतिक आकृतियों के साथ जोड़ा गया है-ओडिशा इकत को यूनान के डिजाइनों के साथ, कांचीपुरम को नॉर्वे के रूपों के साथ, मूगा को मिस्र के तत्वों के साथ, पटोला को स्पेनिश प्रभावों के साथ और बनारसी को यूएई से प्रेरित परिधानों के साथ-जो भारत की हथकरघा कला को एक नया डिजाइन परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है।

'विश्व सूत्र - दुनिया के लिए भारत की बुनाई' ने भारतीय हथकरघा की भव्यता को मूर्त रूप दिया।

विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने मीडिया को बताया कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने, आजीविका को सहारा देने और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने में हथकरघा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के ''गांव से वैश्विक'' दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए, पारंपरिक बुनाई को आधुनिक डिजाइन और बदलते बाजार परिदृश्य से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया।

61वीं फेमिना मिस इंडिया की विजेता साध्वी सतीश सैल ने पारंपरिक कुनबी बुनाई से बनी स्कर्ट पहनी थी, जिसे मध्य यूरोपीय शैली में नया रूप दिया गया है। अपनी समृद्ध विरासत के लिए मशहूर कुनबी बुनाई, का नाम कुन (परिवार) और बी (बीज) से मिलकर बना है। यह पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही कुशलता और समुदाय के अटूट बंधन का प्रतीक है।

कपड़ा मंत्रालय ने कहा है किइस पहल के द्वारा भारत सरकार की पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में परिवर्तित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो ''लोकल से ग्लोबल तक वोकल'' की दृष्टि और प्रधानमंत्री के 5एफ ढांचे (फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन) के अंतर्गत आती है।

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