पटना , जनवरी 15 -- ब बॉलीवुड से लेकर टॉलीवुड की फिल्मों में जल्द ही बिहार के मनोरम एवं ऐतिहासिक स्थानों के दृश्य देखने को मिलेंगे।
बिहार सरकार की वर्ष 2024 में आई फिल्म प्रोत्साहन नीति के कारण पिछले एक वर्ष में 39 फिल्मों को शूटिंग की अनुमति दी जा चुकी है। इसमें 33 फिल्मों की शूटिंग भी अलग-अलग स्थानों पर पूरी हो चुकी है। जबकि, शेष फिल्मों की शूटिंग जारी है। खास बात यह है कि ये फिल्में सिर्फ भोजपुरी तक सीमित नहीं हैं। बल्कि हिंदी, अंग्रेजी, भोजपुरी और मगही जैसी कई भाषाओं में बनाई जा रही हैं। इससे बिहार बहुभाषी और विविधतापूर्ण सिनेमा निर्माण का उभरता हुआ केंद्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।
रूपहले पर्दे पर भी राज्य की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य की छटा देखने को मिलेगी। फिल्मों की शूटिंग करने वालों के लिए यहां माहौल बेहद फ्रेंडली प्रतित हो रहा है। इस कारण बड़ी संख्या में देश-विदेश के निर्माता-निर्देश यहां के अलग-अलग स्थानों में शूटिंग की रूचि दिखा रहे हैं। इस बदलाव के केंद्र में है राज्य सरकार की दूरदर्शी 'बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति' है, जिसने बिहार को फिल्म निर्माण के नए नक्शे पर स्थापित कर दिया है।
फिल्म निर्माता को अपनी फिल्मों के लोकेशन के लिए मुंबई और दिल्ली से बेहतर विकल्प पटना, राजगीर, नालंदा, गया, भागलपुर और मोतिहारी जैसे शहरों में मिल रहे हैं। इन स्थानों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक खूबसूरती शूटिंग के लिए बेहद पसंद किए जा रहे हैं। यहां शूटिंग होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है। होटल, कैटरिंग, ट्रांसपोर्ट और अन्य सहायक सेवाओं में मांग तेजी से बढ़ी है। इससे स्थानीय स्तर पर कई तरह के रोजगार के अवसर विकसित हो रहे हैं। फिल्म से जुड़े कई क्षेत्रों में भी अवसर बढ़ रहे हैं।
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