श्रीनगर , मार्च 06 -- जम्मू कश्मीर में श्रीनगर की एक अदालत ने कथित जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) घोटाले में नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया है जबकि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से संबंधित मामले में अतिरिक्त आरोप जोड़ने वाले आवेदन को खारिज कर दिया है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, तबसुम ने दो मार्च को अपने आदेश में कहा है कि रणबीर दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) के तहत अपराध के आवश्यक तत्व सभी आरोपियों के खिलाफ सिद्ध होते हैं।

अदालत ने कहा कि अब्दुल्ला समेत सभी आरोपियों पर उक्त अपराधों के लिए आरोप तय किए जाएंगे। अदालत ने आरोप तय करने के लिए मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च निर्धारित की है।

अदालत ने इसके साथ ही ईडी की ओर से मामले में अतिरिक्त अपराध जोड़ने की मांग संबंधी याचिका को भी खारिज कर दिया।ईडी ने अदालत से अनुरोध किया था कि मामले में धारा 411 और 414/424 को अतिरिक्त आरोपों के रूप में शामिल किया जाए। अदालत ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि ईडी इस मामले में जांच एजेंसी नहीं है।

जम्मू-कश्मीर के जेकेसीए घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो ने की थी जिसने पहले ही अपना आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। न्यायाधीश ने कहा कि ईडी ऐसे मामले में नए आरोप नहीं लगा सकती जिसकी जांच और अभियोजन किसी अन्य एजेंसी द्वारा किया जा चुका है।

अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय के आर के एम पॉवरजेन प्राइवेट लिमिटेड बनाम सहायक निदेशक और अन्य, 2025 मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ईडी कोई सुपर कॉप नहीं है जो अपने संज्ञान में आने वाली हर चीज की जांच करे।

अदालत ने कहा "पीएमएलए की अनुसूची के अंतर्गत आने वाली कोई आपराधिक गतिविधि होनी चाहिए और ऐसी आपराधिक गतिविधि से अपराध की आय प्राप्त होनी चाहिए तभी ईडी का अधिकार क्षेत्र लागू होता है।" न्यायालय ने यह भी कहा कि ईडी का आवेदन सिद्ध नहीं होता है और तदनुसार इसे खारिज किया जाता है।

सीबीआई ने 2018 में जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन घोटाले के संबंध में फारूक अब्दुल्ला और कई अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। उन पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा स्वीकृत धनराशि से लगभग 43 करोड़ रुपये के गबन का आरोप था। सीबीआई ने 2015 में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश पर जम्मू-कश्मीर पुलिस से यह मामला अपने हाथ में लिया था।

सीबीआई के अनुसार श्री अब्दुल्ला के जेकेसीए के अध्यक्ष रहने के दौरान 2002 से 2011 के बीच धनराशि का गबन किया गया था। आरोप पत्र में एजेंसी ने तीन अन्य आरोपियों का नाम भी शामिल किया था जिसमें जेकेसीए के पूर्व महासचिव मोहम्मद सलीम खान, पूर्व कोषाध्यक्ष अहसान अहमद मिर्जा और जम्मू-कश्मीर बैंक के कार्यकारी बशीर अहमद मिसगर का नाम शामिल था।

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