चंडीगढ़ , फरवरी 10 -- पंजाब के खान एवं भूविज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने मंगलवार को बताया कि केन्द्र सरकार के खान मंत्रालय के राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास ट्रस्ट की परियोजना स्वीकृति समिति ने गत दिवस हुई अपनी बैठक में "पंजाब के फाजिल्का जिले के चोहरियानवाली क्षेत्र में पोटाश के लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण जी-4" नयी अन्वेषण परियोजना को मंजूरी दी है।
श्री गोयल ने बताया कि यह परियोजना मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड द्वारा 48.0 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 1903.11 लाख रुपये के स्वीकृत परिव्यय और 21 महीने की पूर्णता अवधि के साथ संचालित की जाएगी। स्वीकृत योजना के अनुसार, परियोजना की समीक्षा नौ महीने बाद की जाएगी। पहले चरण में 3200 मीटर के ग्रिड अंतराल पर कुल 5700 मीटर की ड्रिलिंग के साथ छह बोरहोल खोदे जाएंगे। दूसरे चरण में समीक्षा के बाद संभावित माने गए क्षेत्रों में 1600 मीटर के ग्रिड अंतराल पर कुल 8550 मीटर की ड्रिलिंग के साथ नौ अतिरिक्त बोरहोल खोदे जाएंगे।
गौरतलब है कि पिछले जनवरी महीने में, बरिंदर कुमार गोयल ने गुजरात के गांधीनगर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर-2026 के दौरान पंजाब में पोटाश की खोज के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने फाजिल्का जिले में पोटाश के आशाजनक भंडारों की पहचान पर प्रकाश डाला और 2025-26 के फील्ड सीजन के दौरान ड्रिलिंग और भूवैज्ञानिक मानचित्रण कार्यों में तेजी लाने का आह्वान किया।
कैबिनेट मंत्री ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और किसान कल्याण से सीधे संबंध का हवाला देते हुए केंद्रीय एजेंसियों से पंजाब में पोटाश की खोज को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने राज्य के अंतर्गत आने वाले वाष्पीकृत बेसिन क्षेत्रों में विश्वसनीय खनिज भंडार विकसित करने के लिए समय पर कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।
पंजाब सरकार के अन्वेषण क्षेत्र के विस्तार के अनुरोध के बाद, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने हाल ही में 2026-27 के फील्ड सीजन के दौरान फाजिल्का जिले के केरा खेड़ा ब्लॉक और सैय्यदवाला ब्लॉक में पोटाश के लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण और कंधवाला रामसरा ब्लॉक में प्रारंभिक अन्वेषण का प्रस्ताव रखा है। इस कार्यक्रम में 15 चिन्हित स्थानों पर ड्रिलिंग शामिल है। मंत्री ने राज्य के पोटाश संसाधन आधार को मजबूत करने के लिए 2026-27 के फील्ड सीजन की निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी प्रस्तावित ब्लॉकों को पूरा करने का भी अनुरोध किया है।
श्री गोयल ने कहा कि पोटाश देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी लगभग 99 प्रतिशत आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी होती है और घरेलू अन्वेषण और खनन में कोई भी प्रगति राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, कृषि क्षेत्र और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों का समर्थन करेगी।
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