लखनऊ , दिसंबर 09 -- उत्तर प्रदेश फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में लगातार सफलता हासिल कर रहा है। संक्रमण दर में भारी गिरावट दर्ज होने के बाद अब प्रदेश में सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान साल में केवल एक बार चलाया जाएगा। पहले यह अभियान फरवरी और अगस्त मेंदो बार चलाया जाता था।
मंगलवार को राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. ए.के. चौधरी ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन की शुरुआत प्रदेश के 51 जिलों के 782 ब्लॉकों से हुई थी। लेकिन संक्रमण घटने के बाद यह दायरा अब सिमटकर सिर्फ 17 जिलों के 52 ब्लॉकों में रह गया है। इसे प्रदेश में फाइलेरिया के उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में फरवरी और अगस्त से पूर्व किए गए प्रि-टास (ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे), टास और नाइट ब्लड सर्वे (एनबीएस) के आधार पर यह पाया गया कि अधिकांश जिलों में एमडीए की अब आवश्यकता नहीं है। इसी आधार पर अगले वर्ष से केवल फरवरी माह में ही एमडीए अभियान संचालित करने का निर्णय लिया गया है।
डा चौधरी ने कहा कि आगामी एमडीए अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आज 17 जिलों के मास्टर ट्रेनरों को वर्चुअल प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. चौधरी ने कहा कि इस बार एमडीए अभियान में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मास्टर ट्रेनर आगे अपने जिलों में आशा कार्यकर्ताओं, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देंगे, ताकि अभियान को सफल बनाया जा सके।
इन 17 जिलों में से आठ जिलों में सीएचओ-पीएसपी समूह विशेष रूप से दवा खाने से मना करने वाले लोगों को समझाने और रोगियों को दवा सेवन कराने में सहयोग करेंगे। साथ ही प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट कोर ग्रुप बनाया जा रहा है ताकि स्थानीय स्तर पर टीम व समुदाय को जोड़कर कवरेज बढ़ाई जा सके।
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