पटना , फरवरी 03 -- बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ.प्रेम कुमार ने मंगलवार को कृषि फसलों की सुरक्षा के लिए नीलगाय (घोड़परास) और जंगली सूअरों को मारने के प्रावधानों की सावधानीपूर्वक समीक्षा के निर्देश दिए।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की पूर्वाह्न बैठक में विधायक आदित्य कुमार के तारांकित प्रश्न पर पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रमोद कुमार के उत्तर के दौरान हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नीलगायों से फसलों को हो रहे नुकसान और उन्हें मारने के लिए किए गए प्रावधानों की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जाए। उन्होंने सरकार को निर्देश दिया कि इस मुद्दे पर गहन समीक्षा के बाद निर्णय लिया जाए।
मंत्री प्रमोद कुमार ने आज सदन को बताया कि प्रत्येक पंचायत के मुखिया को निर्देश दिए गए हैं और उन्हें ऐसे जानवरों को मारने के लिए शूटरों की सूची उपलब्ध कराई गई है। मंत्री को सुनने के बाद अध्यक्ष ने यह भी कहा कि ऐसे जानवरों से क्षतिग्रस्त फसलों का मुआवजा भी किसानो को दिया जाएगा।
इससे पहले विधायक आदित्य कुमार ने इस मुद्दे को उठाते हुए सदन का ध्यान घोड़परास और जंगली सूअरों द्वारा हजारों एकड़ में फसलों को हो रहे नुकसान की ओर आकृष्ट किया।
मंत्री के वित्तीय वर्ष 2024-25 में 124 ऐसे जानवरों को मारे जाने का उल्लेख करने पर श्री कुमार ने कहा कि यह संख्या अपर्याप्त है और शूटरों की भी कमी है।इस पर मंत्री ने कहा कि शूटरों की सूची पहले ही जिला पदाधिकारियों और मुखियाओं को दे दी गई है और लिखित सूचना मिलने पर घोड़परासों को मारने की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक घोड़परास को मारने पर 750 रुपये और दाह-संस्कार के लिए 1250 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है, जबकि जंगली सूअर को मारने पर 750 रुपये और दाह-संस्कार के लिए भी इतनी ही राशि दी जाती है। उन्होंने कहा कि यदि किसान ऐसे जानवरों द्वारा फसल नुकसान की सूचना प्रशासन को देते हैं तो सरकार 50,000 रुपये तक का मुआवजा देने को तैयार है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए सुझाव दिया कि 'नीलगाय' के स्थान पर प्रचलित शब्द 'घोड़परास' का उपयोग किया जाए, क्योंकि 'गाय' शब्द से भावनाएं जुड़ी होने के कारण लोग इन्हें मारने में हिचकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के आदेश के बावजूद लोग 'नीलगाय' शब्द में 'गाय' जुड़े होने के कारण कार्रवाई से कतराते हैं।उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भ्रम और हिचक दूर करने के लिए इस जानवर को 'नीलबकरी' कहा जाए।
उपमुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि घोड़परास और जंगली सूअरों से किसानों को राहत देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि वह पहले राज्य के कृषि मंत्री रह चुके हैं और इस समस्या की गंभीरता को भली-भांति समझते हैं।
श्री सिन्हा ने जोर दिया कि किसानों और उनकी फसलों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और वन्यजीवों से होने वाली फसल क्षति से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान लागू किए जाने चाहिए।
इस पर मंत्री प्रमोद कुमार ने सदन को बताया कि विभाग ने पहले ही 'नीलगाय' के स्थान पर 'घोड़परास' शब्द अधिसूचित कर दिया है।
इस बीच भाजपा सदस्य मिथिलेश तिवारी ने कहा कि ऐसे जानवरों को मरवाने की जिम्मेदारी मुखिया को सौंपी गई है, लेकिन इसके लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता अक्सर नहीं मिल पाती, जिससे मुखिया कार्रवाई करने से हिचकते हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि 'घोड़परास' और अन्य जंगली जानवरों से जुड़ी समस्याओं की शिकायत के लिए किसानों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए।
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