श्रीनगर , अप्रैल 10 -- जम्मू कश्मीर पुलिस एक ऐसे पाकिस्तानी आतंकी के फरार होने की जांच कर रही है, जो लश्कर-ए-तैयबा के अंतरराज्यीय मॉड्यूल का हिस्सा था और कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पासपोर्ट बनवाकर देश छोड़ने में सफल रहा।
यह जांच हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा लश्कर-ए-तैयबा के एक बड़े मल्टी-स्टेट नेटवर्क के भंडाफोड़ के बाद शुरू हुई है। इस अभियान में दो पाकिस्तानी आतंकवादियों अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा (टॉप कमांडर) और उस्मान उर्फ खुबैब को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें "ए-प्लस" श्रेणी में रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार इस मॉड्यूल का तीसरा सदस्य, कोडनेम 'खरगोश', 2024 में भारत से फरार हो गया। वह पहले घाटी में सक्रिय था और 2022 के आसपास जम्मू-कश्मीर से बाहर चला गया था। बाद में उसने राजस्थान में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल किया और 2024 में दक्षिण-पूर्व एशिया भाग गया। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि आतंकीवादी ने फर्जी पहचान पत्र कैसे हासिल किए, पासपोर्ट कैसे बनवाया और बिना पकड़े देश से बाहर कैसे निकल गया। इस मामले में केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में शामिल हो गई हैं और संभावित मददगारों की पहचान की जा रही है।
सूत्रों ने 'खरगोश' को इस नेटवर्क का अहम सदस्य बताया है, जिसने सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के दौरान मॉड्यूल को जम्मू-कश्मीर से बाहर शिफ्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गिरफ्तार किए गए आतंकी अब्दुल्ला, उस्मान और उनके स्थानीय सहयोगी गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा को इस सप्ताह श्रीनगर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 16 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
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