पटना , फरवरी 17 -- बिहार में कटिहार जिले के मनसाही प्रखंड में निर्मित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन की नई राह दिखा रहा है । बाढ़ और जल-जमाव वाले क्षेत्र में प्लास्टिक अपशिष्ट के अंबार से बढ रही पर्यावरणीय समस्या पर इस प्लास्टिक कचरा प्रबंधन इकाई की स्थापना के बाद काफी हद तक रोकथाम हुई है ।

कटिहार का यह इलाका बाढ प्रभावित है । यहां परंपरागत रूप से जलाशयों की संख्या भी अधिक है । बाढ़ग्रस्त इलाका होने के कारण खेतों और अन्य जमीनों पर लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रहती है । ऐसे में प्लास्टिक कचरा जलाशय और खेतों को प्रभावित कर रहा था । नालियों का जाम होना आम था । प्लास्टिक कचरा से खेतों की उर्वरता के लिए संकट का कारण बन रहा था।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) / लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान अंतर्गत इसकी रोकथाम के लिए प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (पीडब्ल्यूएमयू) स्थापित की गयी । सभी पंचायतों से प्लास्टिक कचरे का नियमित उठाव सुनिश्चित किया गया ।

लोगों को प्लास्टिक को जहां-तहां फेंकने के बजाय अलग से संग्रहित करने के प्रति जागरूक किया गया । पंचायत स्तर से प्लास्टिक कचरे को एकत्र कर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (पीडब्ल्यूएमयू) में लाया जाने लगा। प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रहण के लिए दो स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं । संग्रह किये गये प्लास्टिक कचरे को पहले फटका मशीन द्वारा घूल हटाया जाता है । बेलर मशीन द्वारा बंडल बना दिया जाता है । श्रेडर मशीन से काटकर संग्रहित किया जाता है ।

जिला सलाहकार सीबी एंड आईईसी संतोष कुमार ने बताया कि पीडब्ल्यूएमयू मनसाही में 13,500 किलो प्लास्टिक अपशिष्ट का संग्रहण एवं प्रोसेस किया गया है । यहां दो स्थानीय व्यक्तियों को नियमित रोजगार प्राप्त हुआ है।

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